Tenaliram Ki Chaturai – एक बूंद भी जल गिरा तो सर धड से अलग होगा.

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आप सभी ने तो tenaliram ki chaturai के किस्से सुने ही होंगे. क्या कहा नहीं सुने है तो भाई आपको एसी सूझ-बुझ की तेनालीराम की कहानिया अवश्य पढ़नी चाहिए. इससे न ही आपको अच्छा ज्ञान मिलेगा बल्कि आपकी सोचनी और समजने की शक्ती भी तीव्र हो जाएगी.

tenaliram ki chaturai in hindi
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आज की इस tenalirama ki chaturai की पोस्ट मे आपको एक एसी तेनालीराम की हिंदी कहानी सुनाने जा रहे है जो अपने विरोधियो तक अपनी planing का अंदाजा नहीं होने देते थे. एसी ही सूझ-बुझ भरी tenali rama stories निचे पढ़ने मे आपको मजा जरुर आएगा.

कहानिया हिंदी की तो आपने बेहद सुनी होगी लेकिन तेनालीरामा के गजब किस्से पढ़कर आपको अवश्य ही आचार्य चाणक्य की chanakya niti याद आएगी जो हर एक कहानी मे एक सिख दे जाती है जो पुरे जीवन भर अपने जीवन चर्या को बदल देती है.

Tenaliram Ki Chaturai.

एक वक्त सम्राट कृष्णदेव राय अमरकंटक की यात्रा को गये. उनके साथ प्रमुख दरबारी लोग और अंगरक्षक भी थे. नर्मदा नदी के उगमस्थान पर उन्हे एक सिद्द संतके दर्शन हुए. संत पृथ्वीके एक फूट उंचीपर स्थित थे.

आंखे बंद थी, मूख से निरंतर om शब्द का उच्चार हो रहा था. नीचे जमीन पर मृगजिन पड़ी हुई थी यह देखकर सम्राट विस्मित हुवा

दरबारियों के साथ हाथ जोड़कर वहीं बैठा रहा कुछ देर बाद साधु ने आंख खोली, धीरे धीरे पृथ्वी के दिशा में आए इस धरती पर डाली हुई जिन पर बैठे हाथ जोड़कर सामने बैठा कृष्णदेव राय को देख कर बोले..

‘बोलो कृष्णदेव राय खुशी में तो हो’, ‘हां महाराज’ सम्राट कृष्णदेव राय ने विनीत स्वर में उत्तर दिया ‘परंतु’ ‘ओ मैं जानता हूं’ संत बोले ‘आज कल विजयनगर साम्राज्य पर आर्थिक संकट आया है, शत्रु के निरंतर संकट का माहौल बना है, शत्रु के निरंतर आक्रमण से राज्य का खजिना खाली हो गया है.यही है ना?’

सम्राट नतमस्तक हुआ साधु ने सम्राट को एक कटोरा दिया उसमें नर्मदा का पानी लाने को बोला सम्राट कटोरी में नर्मदा का जल भरकर लाया साधु ने अपनी उंगली कटोरे में डूबाई और कुछ मंत्र पढ़कर सम्राट से बोले..

कटोरे में मंत्र बद्द जल को 7 दिन तक अपनी कोषागार में डालो खाली कोषागार भर जाएगा कुछ खाली नहीं रहेगा लेकिन सावधान जल कटोरे में से गिरना नहीं चाहिए.

सम्राट खुश होकर उठा जल से भरा हुआ कटोरा लेकर सावधानी से अपने छावनी में वापस आया. विजय नगर में कुछ करने का आदेश दिया डेरे बंबू उखाड़े गए सामान बांध दिया गया. रथ से घोड़ी जोड़े गए लेकिन सम्राट चिंतामग्न था, समस्या बड़ी गंभीर थी, जल से भरा हुआ कटोरा मार्ग के सब अर्चनी से सुरक्षित विजयनगर तक पहुंचाना सबको impossible लग रहा था.

सम्राट कृष्णदेव राय एक-एक कर सब दरबारियों को उनका दायित्व पूरा करने को कहा कोई भी उसे निभाने के लिए तैयार नहीं था. आखिर तेनालीराम खड़ा हुआ सम्राट उसे देख निराशा से बोले ‘तेनालीराम अगर यहां आया तब सोया ही रहता था इसे पूछना ही व्यर्थ है.

Tenaliram Ki Chaturai सर कलम कर दिया जायेगा.

नहीं महाराज अचानक तेनालीराम बोला, सोया तो मे इसलिए था कि मेरे पास कोई काम नहीं था पवित्र जल का एक कटोरा साथ रहेगा तो मुझे नींद नहीं आएगी सम्राट बोले ‘सोच लो अगर इस कटोरी में से जल कम हुआ या गिरा तो तुम्हारे सर को धड़ से अलग कर दिया जायेगा.

तेनालीराम कहा जी महाराज उसी के साथ वह जल का कटोरा लेकर बोला प्रस्थान का आदेश दे महाराज. सम्राट ने सबको अपने अपने रथ पर सवार होकर प्रस्थान का आदेश दिया पूरा समूह विजयनगर की दिशा में जाने लगा.

तब लोग जाते हुए रास्ते में इस कटोरा के बारे में सोच रहे थे सम्राट चिंतीत थे. जब उन्होंने सैनिक को भेज कर कटोरे के बारे में जानना चाहा तब उनको सूचना मिली कि तेनालीराम रात में सोया हुआ है और कटोरी कहां है किसी को पता ही नहीं.

मंत्री सेनापति पुरोहित आदि इस खबर से मन ही मन खुश हो रहे the. आगे आगे सेनापति का रथ था जो सबको ऐसे रास्ते से ले जा रहा था जो खराब था. तेनालीराम का रथ जोर जोर से हिल रहा था विजय नगर आते आते सबको विश्वास हो गया की कटोरे का जल इतनी कठिन यात्रा के बाद गिरकर उसका लड्डू बन गया होगा.

रथ महल के आगे रुका. तब सम्राट सैनिकों से बोले तेनालीराम को उठा कर पवित्र जल से भरा कटोरा मुझे दो. जैसे-जैसे सैनिक तेनालीराम के रथ के पास जा रहे थे दरबारियों को तेनालीराम का मृत्यु नजदीक दिख रहा था.

तेनालीराम उस वक्त भी सोया था सैनिकों ने उसे उठाया तब वह उठ पाया. tenaliraman ने बाहर देखा दो सैनिकों से कहानी सुनी तब छत को बंधा हुआ अपना झूला निकाल कर सम्राट की तरफ कर दिया गया.

तेनालीराम को कटोरा के जगह झूला ला कर देख सम्राट बोले मैंने तुम्हें कटोरा लाने को कहा था झोला नहीं. वही है अन्नदाता tenaliram ने झूले में हाथ डालकर जल से भरा हुवा कटोरा सम्राट को दिया.

चारों तरफ से सब लोग अचंबेसी उसकी तरफ देख रहे थे सम्राट कभी तेनालीराम की झूले की तरफ देखते तो कभी जल से भरे हुए कटोरे की तरफ. जब उनसे रहा नहीं गया तब वह बोले क्या तुम मुझे बताओगे झूले में रखकर तुम कटोरा कैसे सुरक्षित लाए जो तुम मांगोगे वह तुम्हें मिलेगा.

तेनालीराम जोर से हसेऔर झोली में हाथ डालकर एक फुगा निकालकर राजा के सामने रख दिया और बोला मैंने तो जल से भरा हुआ यह कटोरा ही फुगे मे रख दिया था. फुगा का रबर कटोरी की चारी बाजू से पक्के है इसलिए पवित्र जल से भरा हुआ कटोरा यहा तक सुरक्षित आया महाराज.

सम्राट krushn devray अभिमान से बोले तेनालीराम की चतुराई पर विजयनगर को हमेशा तुम पर गर्व रहेगा. आपकी कृपा महाराज tenalirama बोला. और इसके बाद सम्राट ने उसे गले लगाया और रास्ते में तेनालीराम का अहित सोचने वालों का सर शर्म के मारे झुके हुए थे.

क्या सिखने को मिला tenaliram ki chaturai से.

इस तेनालीरामा की हिंदी कहानी से यह सिख मिलती है की चाहे अपने बारे मे अहित सोचने वाला कितना भी बुद्धिमान, शक्तिमान क्यो न हो उसे पटकनी तभी दी जा सकती है जब उसे आपके planning की भनक तक लगने ना दी जाये. यही होती थी तेनालीराम के किस्सो की अजब सोच जो दुशमनो को चकमा देने मे नंबर एक होती थी.

और भी कई सारी tenali ramakrishna stories in hindi इस ब्लॉग पर पब्लिश होने वाली है. आप भी इनके किस्सो से परिचित होना चाहते है तो देरी किस बात की है अभी बुकमार्क कीजिये इस page को और जब चाहो तब हमारी कहानिया पढ़िए.

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