JamilaaBanu Se Mulakat Gul Ne Sanobar Ke Sath Kya Kiya Part 7

प्रिय पाठक, स्वागत है आपका आज की हिंदी कहानी संग्रह की JamilaaBanu Se Mulakat गुल ने सनोबर के साथ क्या किया पार्ट ७ की हिंदी स्टोरी पर. पार्ट 6 ख़त्म होने के अनुसार उस बाग़ मे एक सुन्दर श्री बैठी हुयी थी सामने के झरने की मछलियों को वह थाली के दाने डाल रही थी और मुख से मधुर आवाज मे गाना भी गा रही थी. उसकी आवाज उसकी रूप के समान ही मीठा था.jamilaabaanu se mulakat gul sanobar hindi story

गुल ने सनोबर के साथ क्या किया पार्ट ७ मे शहजादे की JamilaaBanu Se Mulakat होने वाली है. हिरन बना हुवा शहजादा भूक से सुख गया था. कुछ खाने की आंस मे वह उस सुन्दर श्री के पास आया और अपने कोमल नजरो से देखकर उसके पास खाने के लिए याचना करने लगा.

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उस सुन्दर श्री का नाम था जमिलाबनु, उसको हिरन की दया आयी. जमिलाबनु ने प्यार से उस हिरन को पास लिया और उसकी पीठ पर हाथ फेरकर अपनी थालि से पकवान उस हिरन को खिलाये. हिरन खाना खा रहा था तब जमिलाबानु ने हिरन की तरफ देखा और कौन जाने उसे के लगा उसने दासी को आवाज लगाई.

दासी वहा पर आतेही जमिलाबानु ने दासी से कहा, ‘दासी, यह कोई हिरन बीरन नही है, यह तो कोई इन्सान है और उस दृष्ट लतिफाबानु ने ही इसे हिरन बनाया होगा. तुम इसे तुरंत अपने महल मे लेके आओ.

महल मे जाते ही उस सुन्दर श्री ने सबसे पहले स्नान किया. बाद मे मंत्र मारा हुवा पानी से हिरन का भी स्नान करवाया. और सांप जैसी लाठी से उसने जोर से हिरन के सर पर वार किया. जोर से चिल्लाते हुए वह हिरन निचे गिर गया और उसी क्षण हिरन इन्सान की मूल रूप शहजादा बन गया.

अपने आपको फिर से इन्सान के रूप मे देखकर शहजादे को बेहद ख़ुशी हुयी तभी उसकी वही JamilaaBanu Se Mulakat हुयी. बेहद खुशी के साथ जमिलाबनु से शहजादे ने कहा हे सुन्दर श्री आपका एहसान मै जीवन भर नही भूलूंगा आपका बेहद-बेहद शुक्रिया जो आपने मुझे फिर से इन्सान का देह दिलवाया.

आपसे मुलाकात होने से पहले तो मैंने तो आंस ही छोड़ दी थी फिर से मानवी देह मुझे मिलेगा. इश्श इसमें शुक्रिया की क्या बात है आपके नसीब मे JamilaaBanu Se Mulakat लिखा हुवा था तो वह होना ही था.

मुझे प्राप्त मन्त्र शक्तियों का इस्तेमाल मै अच्छे कामो के लिए ही करती हु. किसी भी इन्सान या जानवर को संकट से बचाना मै मेरा परम दायित्व समझती हु. अगर आपको शुक्रिया करना ही है तो आप भगवान का कीजिये जिसने आपकी JamilaaBanu Se Mulakat करवाई.

जमिलाबनु ने शहजादे से उसका नाम पूछा, तभी शहजादे ने कहा मेरा नाम अल्माशरुहबक्श है और मुझे लातिफबनु ने अपनी मायावी शक्ति से हिरन बना दिया था.

इस दौरान दासी ने खाने मे मीठे-मीठे पकवान बनाये और सुन्दर मदिरा भी साथ मे मेजपर रखी. शहजादे के सामने थाली बढ़ाते हुए करते हुए कुछ सोचते हुए जमिलाबानु बोली ये शहजादे आप बुरा ना माने तो एक बात कहू?

उसके इस सवाल को सुनते ही शहजादे ने कहा, जी अवश्य पूछिए आपको क्या पूछना है. जमीला थोड़ी रुकी उसका चेहरा लाज से भर चूका था और सर निचे झुका हुवा था. फिर शरमाते हुए जमिलाबनु बोली.

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हे शहजादे ‘सच कहू तो किसी भी लड़की के द्वारा ऐसे बिना किसी पहचान के इन्सान को यह पूछना अच्छा नही लगेगा, लेकिन कहते है ना प्यार में और संग्राम मे सब जायज है. आजतक मैंने शादी नही की, लेकिन अब मुझे इस अकेलेपन से दर लगाने लगा है, अब मै अकेलेपन से उब चुकी हु.

किसी कर्तुत्ववान व्यक्ति से शादी करके उसके साथ जीवन व्यतीत करू एसी मेरी सोच है और कल से आपको देखकर मेरी यह सोच मेरे जुबान तक पहुच चुकी है. इतना कहकर अचानक शरमाते हुए जमीला रुक गयी.

लेकिन थोड़ी देर रुकने के बाद फिर से उसने शहजादे से कहा, ‘मेरे मन मे यह भावना जागने के बाद आप पहले इन्सान है जो मुझे अच्छा लगा, मै मेरी लाज भी दूर रखकर आपसे कहती हु मै आपसे प्यार करने लगी हु, पता नही क्यों मै आपपर मोहित हो चुकी हु. अगर आपकी मंजूरी हो तभी आपसे शादी करुँगी.

शहजादे ने सोचा की JamilaaBanu Se Mulakat होने से पहले किस तरह धोके से मायावी जादूगरनी ने उसे हिरन बनाया और किस तरह एक सुन्दर श्री ने फिर से इन्सान बनाया. इस सुन्दर श्री की यह भावना तोडना मतलब मतलबी होना जैसा होगा.

शहजादे ने कहा हे सुन्दरे आपकी यह इच्छा तोडना मेरी सबसे बड़ी मुर्खता होगी, आपकी जैसी इतनी सुन्दर पत्नी प्राप्त करना कौन नहीं चाहेगा. आपकी जैसी सुन्दर और गुणों से भरी पत्नी पाकर मै भी बेहद खुश रहूँगा और मै मेरा भाग्य समजता हु की आपने मुझे इस लायक समजा.

उसके इस जवाब से जमिलाबानु बेहद खुश हुयी, लेकिन कुछ सोचते हुए अचानक शहजादे का सर झुका हुवा था. तभी जमीला ने कहा क्या हुवा? क्या आपको मै पसंद नही हु. शहजादे ने कहा नही-नही, जब तक मै मेरे मार्ग मे सफल नही होता तब तक मै आपके साथ विवाह नही कर सकता.

लेकिन वाफाक नगरी से लौटकर जरुर आपसे विवाह करूँगा. मुझे मंजूर है आनंद से जमिलाबानु ने शहजादे से कहा. अपने उंगलियों से अंगूठी निकालकर जमिलाबानु के सुन्दर उंगलियों मे पहनाते हुए उसे विवाह करने का वचन दिया.

JamilaaBanu Se Mulakat से पहले ही जमिलाबनू को शहजादे के सफ़र के बारे मे पता चल चूका था, इसीलिए उसने शहजादे को ज्यादा मनाने की कोशिश नही की. और दुसरे क्षण विवाह के आनंद के समय मीठे पकवान के साथ खाना खाया.

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जमिलाबानु के साथ एक दिन साथ गुजारने के बाद शहजादा जाने के लिए तैयार होने लगा, तभी जमीला ने उसे एक तीर कमान और धनुष और कमान मे बहुत सारे तीर दिए. एक तेज तलवार और उससे भी तेज खंजीर भी शहजादे को दिया और बोली यह सभी जादू के शस्त्र है और इनके विशेष गुण है.

यह धनुष और कमान हजरत सालेह पैगम्बर रस्लम इनका है और यह तलवार अकबर सुलेमान की है. यह सामने रखाते ही धुल और मिट्ठी का तूफान उठेगा, बड़े-बड़े पहाड़ भी इसके सामने ढेर हो जायेंगे.

यह खंजीर तैमुसी खंजीर है, यह जिसके पास होगा उसके शरीर को इतनी ताकत मिलेगी की किसी भी वार को वह सहन कर सकता है. किसी भी शस्त्र का उसपर कोई असर नही होगा.

चलो मै अब आपको वाफाक नगर का रास्ता बताती हु. यहाँ से पश्चिम की तरफ बहुत दूर चलने के बाद एक बड़ा मैदान आएगा. वहापर ८० फीट का एक बेहद बड़ा बाग़ रहता है वह सभी बाघों कर रजा है. आप उससे ना गबराते हुए कुछ जानवरों की शिकार करके उस बाघ को खिलाइए और उसकी थोड़ी सेवा करिए जिससे वह आपपर खुश होगा.

उसकी इस सेवा को देखकर वह आपके सफ़र मे आपके साथ रहेगा और आपकी रक्षा करेगा. तब आपको डरने की कोई आवश्यकता नही होगी. आगे जाने के बाद दो रास्ते मिलेंगे. उसके बाहे तरफ के रास्ते से आप जाना. बहुत दूर चलने के बाद ‘खुमाशा’ नाम का बेहद बड़ा पत्थर का किला आपको दिखाई देगा.

उस पत्थर का किला तरमताक बादशहा का है. उसके पास दो लाख से भी ज्यादा दानव है. लेकिन आपके पास दिए हुए इन शस्त्रों की वजह से वह आपसे मित्रता करेगा.

वहा से आगे चलकर आप शहामृग के प्रदेश मे दाखिल होंगे. इसके आगे का सफ़र आपको उन्ही की मदत से करना होगा. क्योकि बिच मे बहुत बड़ा समंदर फैला हुवा है. यह पार करने के बाद ही आप वाफाक शहर पोहोच सकते है. इतना कहकर वह चुप हो गयी.

शहजादे ने कहा हे सुंदरी JamilaaBanu Se Mulakat करने के बाद अब मुझे पूरा यकीन है की मै जल्द मेरे सफ़र को पार करूँगा. आपकी बताई सारी बाते मैन ध्यानसे सुनी है. अब मै आगे के सफ़र पर निकालता हु आप मुझे जाने की आज्ञा दे.

बहुत दूर तक जमीला भी शहजादे के साथ-साथ आयी. तभी शहजादे ने कहा हे सुंदरी अभी आप वापस लौट जाये आप चिंता न करे JamilaaBanu Se Mulakat मै पुरे रस्ते मे याद करता रहूँगा. मेरी चिंता मत करिए, मै ठीक-ठाक वापस आ जाऊंगा और आपसे शादी भी करूँगा.

इतना कहकर शहजादे ने जमिलाबानु से अलविदा ली और निकल पड़ा आगे की और वाफाक नगरी की तरफ. इस प्रकार से JamilaaBanu Se Mulakat गुल ने सनोबर के साथ क्या किया पार्ट ७ की यह कहानी समाप्त हुयी जल्द ही पार्ट ८ पब्लिश करेंगे.

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