इन्टरनेट कनेक्शन की जानकारी जो सभी को होनी चाहिए? Internet Connections कितने प्रकार के होते है?

प्रिय पाठक, स्वागत है आपका आज के इन्टरनेट कनेक्शन कितने प्रकार के होते है? किसे कहा जाता है इंटरनेट कनेक्शन इस पोस्ट पर. पूरी दुनिया इंटेरनेट की दीवानी हो चुकी है एसा कहने मे कोई हर्ज नही है. क्योकि इसके बिना अब कोई काम पूरा नही होता. हर इन्टरनेट यूजर Internet Bandwidth और इन्टरनेट की कीमत इन दो भाग के आधार पर ही कौन सा Internet Connection इस्तेमाल करना है यह Decide करता है.Internet Connection Information In Hindi

Internet Speed उसकी बैंडविड्थ पर निर्भर करती है. Internet Access करने के लिये आपको उसके Connections की जानकारी होना बेहद जरुरी है, कुछ इंटरनेट कनेक्शन्स इस प्रकार है. चलिए जानते है Different Types Of Internet Connection की पूरी जानकारी विस्तार से.

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Types Of Internet Connection. (इन्टरनेट कनेक्शनस के प्रकार).

बहुत सारे Internet Providers भारत मे अपना पैर जमा चुके है. हर कोई इन्टरनेट प्रोवाइडर अपनी तरफ से सबसे अच्छी और फास्टेस्ट सेवा देने का प्रयास करता है. लेकिन क्या आप उससे पहले जानते है की आखिर Internet Connection कितने टाइप्स के होते है? जो हमेशा इसका इस्तेमाल करते है उनमे कुछ यूजर जानते होंगे और कुछ नही भी लेकिन आपको इसके बारे मे जरुर जानना चाहिए जो निचे दिए गए.

  1. डायल अप कनेक्शन्स,
  2. ब्रॉडबैंड कनेक्शन्स,
  3. वायरलेस कनेक्शन.

चलिए अब विस्तार से इनके बारे मे जानते है की आखिर कौनसा Internet Connection होता कैसा है और कैसे काम करता है.

  1. Dial up Connection.

डायल अप पुर्व उपस्थित टेलीफोन लाइन की सहायता से इंटरनेट से जुड़ने का एक माध्यम है. जब भी उपयोगकर्ता डायल-अप कनेक्शन्स को चलाता है, तो पहले Modem Internet Service Provider (ISP) का फोन नंबर डायल करता है, जिसे Dial Up Calls को प्राप्त करने के लिये तैयार किया गया है व फिर ISP Connections स्थापित करता है. जिसमे सामान्य रुप से दस सेकंड्स लगते है. सामान्यतः शब्द isp उन कंपनियों के लिये प्रयोग किया जाता है जो Customers को Internet Connections  प्रदान करती है. उदाहरण के लिये, कुछ प्रसिध्द आई एस पी के नाम है- Airtel, MTNL, Vodafone आदि.

2. Broadband Connection.

ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल High Speed Internet Access के लिये सामान्य रुप से होता है. यह इंटरनेट से जुड़ने के लिये Telephone Lines का इस्तेमाल करता है. Broadband User को डायल-अप कनेक्शन से तीव्र गती पर इंटरनेट से जुड़ने की सुविधा प्रदान करता है. Broadband Internet Connection में भी चार अलग-अलग प्रकार की High Speed ​​Transmission Techniques भी शामिल है, जो कि की निचे दी गयी है.

  • A) डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन ( DSL- digital subscriber line).

यह एक लोकप्रिय ब्रॉडबैंड कनेक्शन है , जिसमे इंटरनेट एक्सेस डिजिटल डेटा को लोकल टेलिफोन नेटवर्क के तारो द्वारा संचरित किया जाता है. यह डायल सेवा की तरह, किंतु उससे अधिक तेज गति से कार्य करता है, इसके लिये DSL Internet Modem की आवश्यकता होती है, जिससे टेलीफोन लाइन तथा Computer को जोड़ा जाता है.

  • B).केबल मॉडम (Cable modem).

इसके अंतर्गत केबल ऑपरेटर्स कोएक्सिअल केबल के माध्यम से इंटरनेट आदि की सुविधाये भी प्रदान कर सकते है, इसकी Transmission Internet Speed 1.5 Mbps या इससे भी अधिक हो सकती है.

  • C). फाइबर ऑप्टिक (Fiber Optic).

फाइबर ऑप्टिक तकनीक Medical Vertical Signals के रुप में उपस्थित डेटा को प्रकाशीय रुप में बदल कर उस प्रकाश को Transparent glass fiber जिसका व्यास मनुष्य के बाल के लगभग बराबर होता है, के जरिय प्राप्तकर्ता तक भेजता है.

  • D). ब्रॉडबैंड ऑवर पावर लाइन (Broad band over power line).

निम्न तथा माध्यम वोल्टेज के इलेक्ट्रिक पावर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर ब्रॉडबैंड कनेक्शन्स की सर्विस को ब्रोडबन्डिंग कनेक्शन्स की सर्विस की ब्रॉडबैंड ऑवर पॉवर लाइन कहते है, यह उन क्षेत्रों के लिये उपयुक्त है, जहा पर पॉवर लाइन के अलावा कोई और उदाहरण माध्यम उपलब्ध नही है, उदाहरण- ग्रामीण क्षेत्र इत्यादीं.

  • 3. वायरलेस कनेक्शन (Wireless connection).

Wireless Broadband ग्राहक के स्थान और सर्विस प्रोवाइडर के बीच रेडियो लिंक का प्रयोग कर घर या व्यापार को Internet Connetion की मदत से इन्टरनेट से जोड़ता है. वायरलेस स्थिर या चलायमान होता है. इसे केवल या मॉडम इत्यादीं की आवस्यकता नही होती व इसका प्रयोग हम किसी भी क्षेत्र में,जहा DSL व केबल इत्यादि नही पहुँच सकते , कर सकते है.

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  • A) वायरलेस फिडेलिटी (wireless fidelity-wifi).

यह एक सार्वत्रिक वायरलेस तकनीक है, जिसमे रेडियो आवृत्तियों को डेटा ट्रांसफर करने में प्रयोग किया जाता है, वाई फाई केबल या तारो के बीना ही उच्च गति से इंटरनेट सेवा प्रदान करती है, इसका प्रयोग हम रेस्तरां, कॉफी शॉप, होटल, एयरपोर्ट्स और सिटी पार्को इत्यादीं में कर सकते है.

  • B. वर्ल्ड वाइड इंटरऑपेरेबिलीटी फॉर माइक्रोवेव एक्सेस (wimax- world wide interoperability for microwave access).

वाईमैक्स सिस्टम्स आवासीय तथा इंटरप्राइजेज ग्राहकों को इंटरनेट की सेवाएं प्रदान करने के लिये बनाई गई है, यह वायरलेस मैक्स तकनीक पर आधारित है. वाईमैक्स मुख्यतः बड़ी दूरियों व ज्यादा उपयोगकर्ता के लिये WiFi की भांति , किंतु उससे भी ज्यादा गति से Internet facility provide करने के लिये प्रयुक्त होता है. वाईमैक्स को wimax- forum ने बनाया था, जिसकी स्थापना जून, 2001 में हुई थी.

  • C. मोबाईँल वायरलेस ब्रॉडबैंड सर्विसेज(mobile broadband service).

Broadband Serveces Mobile और Telephone Service Provider  से भी उपलब्ध है. इस प्रकार की सेवाएं सामान्य रुप से मोबाईल ग्राहकों के लिये उचित है, इससे प्राप्त होने वाली स्पीड बहुत कम होती है. यह Mobile Internet Connection उसके स्पीड को कम ज्यादा करता रहता है.

  • D.सेटेलाइट (satellite).

Satellite Internet Connection, टेलीफोन तथा टेलीविजन सेवाओं के लिये आवश्यक लिंक उपलब्ध कराते है. इसके साथ ब्रॉडबैंड सेवाओं में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. इसीके साथ साथ आपको ISDN क्या होता है इसकी भी जानकारी होना जरुरी है.

इंटीग्रेटेड सर्विसेज डिजिटल नेटवर्क (integrated services digital network).

ISDN यह एक डिजिटल टेलीफोन सेवा है, जिसका उपयोग ध्वनि डेटा व कंट्रोल सूचनावो इत्यादि को एकल टेलीफोन लाईन पर संचरित करने मे किया जाता है, इसका प्रयोग वृद्स्तर पर व्यापारिक उद्देशों के लिये होता है.

इंटरकनेक्टिंग प्रोटोकॉल्स(inter connecting protocols).

यह प्रोटोकॉल नियमो का वह सेट है, जोकि Data Communication की देखरेख करता है जिसमे कुछ प्रोटोकॉल निचे दिए गए प्रकार के है.Internet Connection Kya Hai Puri Jankari Hindime

Internet Data Communication Types.

A.  TCP/IP (transmission control protocol internet protocol).

TCP/ip, end to end Connectivity (जिसमे डेटा की फार्मिंग, Addressing transmission के Roots और इसे प्राप्त करणे की विधि इत्यादि सम्मिलित है.) प्रदान करता है. इस प्रोटोकॉल के मुख्य रूपः से दो भाग है पहला TCP और दूसरा IP होता है.

  • i. Tcp यह संदेश को प्रेषक के पास ही पैकेटों के एक सेट में बदल देता है. जिसे प्राप्तकर्ता के पास पुनः इकठ्ठा कर संदेश को वापस हासिल कर लिया जाता है, इसे कनेक्शन्स ओरिएंटेड (Connection oriented Protocol) भी कहते है.
  • ii.  IP- यह विभिन्न कंप्यूटरो को नेटवर्क स्थापित करके आपस में संचार करणे की अनुमति प्रदान करता है. IP नेट्वर्क पर पैकेट भेजने का कार्य संभालती है.यह अनेक मानकों के आधार पर पैकेटों के एड्रेस को बनाये रखता है. प्रत्येक IP पैकेट में स्त्रोत तथा Destination का पता होता है.

B. फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल.

File transfer Protocol-FTP के द्वारा इंटरनेट उपयोगकर्ता अपने कंप्यूटरो से फाइलों को विभिन्न वेबसाइटों पर अपलोड कर सकते है या वेबसाइट से अपने पीसी में डाउनलोड कर सकते है. FTP Software के उदाहरण है- File zilla, Kasablanca, ftp, Konqueror इत्यादि.

C. हायपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल.

Hypertext transfer protocol यह इस बात को सुनिश्चित करता है कि संदेशों को किस प्रकार फॉर्मेट किया जाता है व विभिन्न कमांडो के उत्तर में वेब सर्वर तथा ब्राऊजर क्या एक्शन लेंगे. HTTP एक स्टेटलेस प्रोटोकॉल (stateless protocol) है, क्योकि इसमें प्रत्येक निर्देश स्वतंत्र होकर क्रियान्वित होते है.

D. हायपरटेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज.

Hypertext Markup Language इसका इस्तेमाल Website Design बनाने में इस्तेमाल होता है. मार्कअप लैंग्वेज, मार्कअप (चिन्ह) टैग का एक सेट होता है जो वेब ब्राऊजर को यह बताता है की वेब पेज पर शब्दो, इमेजों इत्यादीं को उपयोगकर्ता के लिये किस प्रकार प्रदर्शित करना है.

E.टेलनेट प्रोटोकॉल.

Telnet protocol सेशन वैध यूजरनेम तथा पासवर्ड को प्रविष्ट करने पर शुरु हो जाता है. यह एक नेटवर्क प्रोटोकॉल है, जिसमे वर्चुअल कनेक्शन का इस्तेमाल करके द्विदिशीय टेक्स्ट ओरिएंटेड कम्युनिकेशन को लोकल एरिया नेटवर्क पर प्रदान किया जाता है.

F. यूज़नेट प्रोटोकॉल.

Usenet protocol इसके अंतर्गत कोई केंद्रीय सर्वर या एडमिनिस्ट्रेटर नही होता है. इस सेवा के तहत इंटरनेट उपयोगकर्ता का एक समूह किसी भी विषय पर अपने विचार सलाह आदि का आपस में आदान प्रदान कर सकते है.

G. पॉइंट टू पॉइंट प्रोटोकॉल.

Point to point protocol यह एक डायल अकाउंट है जिसमे कंप्यूटर को इंटरनेट पर सीधे जोड़ा जाता है. इस आकार के Internet Connection में एक मॉडम की आवश्यकता होती है, जिसमे डेटा को 9600 बिट्स/सेकण्ड्स से भेजा जाता है.

H.वायरलेस अप्लीकेशन प्रोटोकॉल.

Wireless application protocol यह Wap Browser है. यह प्रोटोकॉल web browser को सेवाये प्रदान करता है

I.वॉयस ऑवर इंटरनेट प्रोटोकॉल.

Voice Over Internet Protocol यह IP Networks पर ध्वनि संचार का वितरण करने में प्रयोग होती है, जैसे – IP Calls.

How To Choose Fastest Internet Connection.

जब भी कोई Internet User इन्टरनेट कनेक्शन लेने की सोचता है तो उन्हें ऊपर दी गयी जानकारी होना जरुरी है जिससे सही Internet Connection Provider चुनने मे आसानी होती है. आपकी ज्यादा जानकारी के लिए इंट्रानेट और एक्सट्रानेट की रोचक जानकारी भी जान लेनी चाहिए.Internet Connection Types Information In Hindi

इंट्रानेट ( intranet).

एक संघटन के भीतर निजी कंप्यूटर नेटवर्को का समुह इंट्रानेट कहलाता है. इंट्रानेट डेटा साझा करने की क्षमता तथा संघटन के कर्मचारियों के समग्र ज्ञान को बेहतर बनाने के लिये नेटवर्क प्रौद्योगिकियों के प्रयोग द्वारा व्यक्तियों या व्यक्तियों के समूह के बीच संचार की सुविधा को आसान करता है.

(एक्सट्रानेट) Extranet.

एक्सट्रानेट एक निजी नेटवर्क है जो सुरक्षित रुप से Vendors), Partners, Customers या अन्य व्यवसायों के साथ व्यापार की जानकारी साझा करने के लिये Internet technologies तथा Public Telecommunication System का इस्तेमाल करता है. एक्सट्रानेट को संघटन के इंट्रानेट के रुप में भी देखा जा सकता है जो संघटन के इंट्रानेट के रुप में भी देखा जा सकता है जो संघटन से बाहर के उपयोगकर्ता के लिये बढ़ा दिया गया हो.

> Read – Internet क्या है? इन्टरनेट का इतिहास क्या है? Internet Services कौन-कौनसी है?

सबसे बुरा तब लगता है जब कोई इन्टरनेट यूजर सर्फिंग करने लगे और उसके स्क्रीन पर There is no internet connection एसा एरर दिखाई दे. इसीलिए सही और Different Internet Services इस्तेमाल करते रहे जिसमे आपको Fastest Internet Speed पहचानना आसान हो जायेगा. आशा करते है इन्टरनेट कनेक्शन और different Internet Connections Types का यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा. अगर आपको Internet Connection क्या है यह पोस्ट पसंद आयी है तो अपने मित्रो के साथ सोशल मीडिया मे जरुर शेयर करे.

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  1. By Anuj

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