Gul Sanobar Story In Hindi Part 10 – गुल सनोबर की रहस्यमय हिंदी स्टोरी पार्ट १०.

Last updated on December 20th, 2017 at 09:12 pm

प्रिय पाठक, स्वागत है आपका Gul Sanobar Story In Hindi की Rahasyamay Kahani Part 10 की हिंदी की कहानी पर. Hindi Serial Apne बहुत देखी होगी जिसमे आपको इस कहानी का कुछ हिस्सा देखने को मिला होगा. पर एसा शायद बहुत कम बार किसी के साथ हुवा होगा की Gul Sanobar Hindi Serial को पूरा देख पाए होंगे.gul sanobar story in hindi

इसीलिए हमने आपके मनपसंद ब्लॉग पर पूरे Gul Sanobar Story In Hindi सीरिज के सभी पार्ट्स को लिखने का प्रयास हिंदी कहानी संग्रह के आर्टिकल्स के माध्यम से किया है. हमने पिछले आर्टिकल मे गुल ने सनोबर के साथ क्या किया पार्ट ९ की एक रहस्यमय हिंदी की कहानी की कहानी को पब्लिश किया था जिसे आप पढ़ सकते है.

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चलिए अब देखते है बची कहानी का Gul Sanobar Story In Hindi पार्ट 10 की कहानी. वाफाक शहर वास्तव में एक बहुत सुंदर और प्रभावशाली शहर था. वहा के मस्जिद के लंबे मनार और ऊंचे इमारते जैसी आसमान को छु रही थी। शहर कि सडके खुली और साफ ठी, उस पर छिड़का हुआ पानी ख़ुशी से डाला गया था। बाजार कई मूल्यवान वस्तुओं से भरा लग रहा था।सड़क पर चलने वाले लोगों के चेहरे बहुत खुश और उत्साही थे. कुल मिलाकर, यह एक सुखी, संतुष्ट और समृद्ध शहर था.

Gul Sanobar Story In Hindi के हर पार्ट को ध्यान से पढ़े. वाकॉफ शहर में प्रवेश करते ही शहजादेने एक सौदागर का वेष धारण कर लिया.उसके प्रसिद्ध व्यापारी कररुखफॉलसे पहचान बनाली. शहजादेके अच्छे पेश आने के वजह से जल्द ही पहचान का रूप दोस्ती में हो गया और इस कररुखफॉलको शहजादे के सिवा मन नहीं लगने लगा.

एक दिन शाम को कररुखफॉलके बाग में आरामसे बाते करते वक्त शहजादे ने उसे पूछा,’आपको गुलने सनोबर के साथ क्या किया इसके बारे में कुछः पता है क्या’?

उसका ये सवाल सुन कररुखफॉल बहोत ही सोच में पड़ गया.

‘इस सवाल का जबाब तुझे क्यू चाहिये’? उसने थोड़े संशय से शहजादे की तरफ देखकर पूछा, ‘तुझे में मेरा अच्छा दोस्त मानता हूं इसीलिये मै तुझपे हात नहीं डाल सकता.लेकिन इस शहर का बादशहा सनोबर ने हुक्म दिया है कि, जो कोइ, ‘गुलने सनोबर के साथ क्या किया’? ययह पूछेगा उसे उसी जगह खत्म कर दिया जाये!’.

‘ मुझे माफ़ कर दो मेरे दोस्त. मुझे ये बात मालुम नहीं थी, ‘शहजादे ने माफ़ी मांगी, ‘ एक देश का सफ़र करते वक्त एक यात्री से यह सवाल सुनने में आया इसीलिये ऐसेही मोह के काऱण मेने पूछा! लेकिन रहने दो. वो सब्जेक्ट हम अब छोड़ देते है.’और फिर उसने बिनती की, क्या मुझे सनोबर बादशाह से मिलने मिलने का मौका मिलेगा’?

‘दोस्त,वो काम तुम मुझपे छोड़ दो’ मैं कलही तुम्हे सनोबर बादशाहसे मिला देता हूं.’

अगले दिन सुबह करुखफॉलने सौदागरके वेष में आये शहजादेको बादशाह के दरबार में ले गया. सनोबर बादशहा युवा और दिखने में बहोत अच्छा था.

दरबार में प्रवेश करते ही शहजादेने सनोबर बादशहाको दुरसे ही प्रणाम किया और शाहमृग ने दिया हुआ मौल्यवान नीला मोती बादशहा को अर्पण करके वो अदब से कहने लगा, जहाँपन्हा मैं ईरान देश का सौदागर हु और कुछ व्यापार के लिये आपके वाफाक शहर में आया हु. इस गरीब की भेट का यह मोती स्विकार करे.

शहजादेका वो प्यार से बोलने का तरीका देख बादशाह को बेहद अच्छा लगा. उसने अर्पण किया हुवा वो निम्बु जितना नीला मोती भी खुबसूरत था. उसके तेज से आँखे मूंद रही थी, बादशहाने उस अप्रतीम रत्न का ख़ुशी ख़ुशी से स्विकार किया. और उसे कुशल मंगल है या नही यह पुछके उसे रातको खाने का निमंत्रण दिया.

रात को शहजादा अच्छे कपडे पेहेनके बादशहा के खास महल में हाजिर हो गया. सनोबर बादशहा उसीकी राह देख रहा था.उसने हँसके शाहजादे का स्वागत किया.

उस खास महलमे कि हुई मेजबानी की व्यवस्था भी बेहद खास थी. एक सुंदर मेजपर हरी चादर बिछाई थी, कांचके बर्तन में फल और तरह तरह की पक्वाने रखी हुयी थी.

बादशहाने उसको थोड़े सन्मान से बड़े आसन पे बिठाया औऱ खाने की शुरुवात करने को कहा, उस स्वादिष्ट खाने को फिर दोनों ने पेट भर के खाया. खाना होते ही उची मदिरा कास्वाद लेते हुये शहजादा सनोबर बादशहा को धीरेसे बोला,’जहाँपनाह’, आपने मेरे प्रति जो स्नेहभाव दिखाया उससे में खुद को सचमे धन्य समझता हूँ. क्या में आपको एक सवाल पूछ सकता हु.’?

> Read – राजकन्या मेहेरंगेज से बदला – गुल सनोबर पार्ट ३.

‘तुम सवाल कर सकते हो, मद्य का प्याला नीचे रखते हुये बादशहाने थोड़े आश्चर्य के साथ कहा.

‘गुलने सनोबर के साथ क्या किया ये जानने की मुझे बहोत ही उत्सुकता है. ‘शहजादेने धीरेसे कहा क्या आप मेरी यह समस्या कम कर सकते है.
उसका वो सवाल सुनते ही बादशाह का ख़ुशी से भरा चेहरा दुखी हो गया. वह व्यथित होकर कहने लगा हे युवा आनन्द के समय में मुझसे ये सवाल पुछके तुने मुझे दुःखी क्यू किया? और फिर बादशहा बहोत क्रोधित हो गया.

वह  क्रोध के साथ खड़ा हुवा और अपनी तलवार निकालते हुये कहने लगा, तूने ये सवाल सीधे मेरे मुंह पे पूछा इसका मुझे आश्चर्य है! तेरी इस गलती का फल तुझे मिलना ही चाहिये. मेरी तलवारसे तुझे मारने के सिवा और कोई चारा मेरे पास नहीं है. इसीलिये मरने के लिये ब चुपचाप तयार हो जावो!’

अब यहाँ से Gul Sanobar Story In Hindi की कहानी का रहस्य उजागर हो सकता है. लेकिन अपने मरने की आज्ञा सुनकर शहजादा बेहद  घबरा गया. समय कठीन है ये वो जान गया! ऐसे वक्त में बहोत ही होशियारी से काम लेना होता है.

‘जहापनाह, मैं आपके मन को कोई ठेस लगी उसका कारण बना उसके लिये मुझे सचमे बेहद ही बुरा लगा रहा है. इसके लिये आप मुझे मार डाले ‘शहजादा नम्रता से कहने लगा’, लेकिन आप ऐसे भी मुझे मारने ही वाले हो तो कम से कम मुझे मेरे इस सवाल का जवाब तो जान लेने दिजीये!’ जिससे मै कम से कम खुशीसे मर तो सकुंगा!.

सनोबर बादशहा को उसका कहना ठीक लगा, उसी क्षण उसने वहाकी दिवार में गुप्त हात दबाया. ओहो आश्चर्य तभी दिवार धीरे धीरे खुलने लगीं और वहाँ एक बड़ा रस्ता बन गया. सनोबर बादशहा ने इशारा किया मेरे पीछे आओ, तभी बादशाह ने इशारा करते ही शहजादा उसके पीछे पीछे उस गुप्त दरवाजे से जाने लगा.

उस खुपिया महल में एक भव्य दालन था. वहा जगह जगह पर सुंदर झूमर लगे हुए थे. बिचमे एक सोनेके सिंहासन पर एक कुत्ता बैठा था. जिसके बदन पर रेशमी कपडे थे. उसके आगे एक सोने की थाली में सुंदर पक्वाने रखे थे और वो कुत्ता उन्हें खा रहा था.

पास ही एक खंबे से एक जवान युवती को जंजीर में जखड़ कर रखा गया था. वह लड़की केतकी के जैसी सुंदर थी. उसकी हिरन के जैसी आंखे रो रही थे. उसकी सुंदर काया बहुत ही कृश हो गयी थी.उसका सुंदर नाजुक बदन सुके हुये गुलाब की तरह हो गया था. बिच बिचमे कुछ सैनिक उसे चाबुक से फटके मारते थे.लहू की धार लगी हुयी थी और वो विवंचना में चिल्लाती थी.gul sanobar story in hindi

उस बदकिस्मत युवती को भुक लगते ही उसे कुत्ते का झुटा खाना खानेको दिया जाता था.

वह चमत्कारिक दृश्य देख शहजादा हिल गया. उसने आश्चर्य के साथ बादशाह से पूछा, ‘जहापनाह यह लड़की कोण हे? और उसे ये सजा क्यू दी जा रही है?’

‘नौजवान यह स्त्री मेरी पत्नी है और इसीका नाम गुल है बादशहा ने स्पष्ट किया.

‘इसकी आपके साथ शादी कैसे हुई कृपया आप मुझे बताएँगे?.’ शहजादे ने घबराये हुये कहा.

आखिर में मैं तुझे मृत्यु दंड देने वाला हु इसीलिये तुझे यह बताने में कोई हर्ज नहीं है बादशहा कहने लगा. तो सुन एकबार मै हमेशा की तरह शिकार के लिए अकेले ही जंगल में गया था. दिन गर्मी के थे, दोपहर को मैं पानी के लिये व्याकुल हो गया और में पाणी की खोज में भटकने लगा.

आखिर में मुझे एक टुटा हुवा कुंवा मिला. मै पाणी की आशा में वहा देखने लगा तो मुझे आश्चर्य का धक्का लगा! उस कुंए मे दो बुजुर्ग महिला पड़ी हुयी थी और वह मुझे उन्हें उपर निकालने के लिये विनती कर रही थी. मुझे उनकी दया आ गई और मेंने बडे कष्ट से उन्हें ऊपर निकाला मैंने देखा की वो दोनों बुजुर्ग महिला अंधी थी.

उन बुजुर्ग महिलाओ की विनती करने के बाद मैंने वहा से नजदीक ही समुन्दर किनारे घूमने वाली जादुई गाय का गोबर लेके आया.और उन दोनों बुजुर्ग महिलाओ की आंख को लगाया.अगले ही क्षण उनकी दृष्टि वापस आ गई. मैंने उनकी आपातकाल मे मदत की इसीलिये वो मुझपे प्रसन्न हो गई और उन्होंने मुझे कहा, ‘हे नौजवान,’तुने हमें सही में बहुमोल मदत कि है.

इसीलिये हम तुझे तेरी हित की बात बताते है वो सुन! यहाँ से पास ही एक सुंदर परीकन्या का महल है. उसके माँ बाप ने उसे जानबूझकर ऐसे अकेले रखा है. वो किसी भी पुरुष को देख ना पाये ये उनका मकसद है. तू वहा गया तो वो तुझपर प्रसन्न होगी और तु उस महल में मजे से रह सकता है. लेकिन अगर ये बात उसके पिता को पता चली तो वो तुझे अग्नि में डाल कर मारने की सजा देंगे. लेकिन डरो मत तु उसके पिता को तेल लगाकर अग्नि में डालने को कहना जिससे हम ही तुम्हे वहा आकर तेल लगायेंगे और उस तेल से तुम्हे अग्नि में कुछ नहीं होगा.!

‘उन बुजुर्ग महिलाओ का बोलना मैंने ध्यानसे सुना और फिर उन्हें धन्यवाद देते हुए मै उस परीकन्याकेँ महल की तरफ गया. ‘वो परिकन्या सही में रूपकी रानी थी. मैं तो उसे देखते ही पागल हो गया और वो सुंदरी भी मेरे रूपरंग पर फ़िदा हो गई. उसने पहली बार ही युवा पुरुषों को देखा इस लिये उसे बहोत आनंद हो रहा था उसने मनसे हँसके मेरा स्वागत किया.’

मैं उस सुंदरीके सहवास में बेहद दिन रहा लेकिन एक दिन हमारे प्रेमसंबंध का पता उसके पिता को लग गया. उन्होंने तत्काल मुझे ढूंढ़ निकाला और मुझे आग में जलाने की आज्ञा अपने सैनिको को दि.’

वो आज्ञा सुनते ही मैंने उसके पिता से कहा, ‘महाराज मुझसे गलती हो गई है इसिलिए आप जो मुझे सजा दे रहे है वो योग्य ही है, बस आप मुझे आग में डालने से पेहले तेल लगा दिजीये जिससे मैं पापी तत्काल जल जाऊंगा.!

मेरा बोलना उसके पिता को ठीक लगा उन्होंने तत्काल मेरे पुरे बदन मे तेल लगाने को हुक्म दिया.’ उस वक्त उन बुजुर्ग महिलाये ने वहा आकार मुझे चमत्कारिक तेल लगाया.

फिर मुझे भड़की हुयी आग में डाला गया लेकिन मुझे कुछ नहीं हुआ आग बंद होते ही मैं ठीकठाक बाहर आ गया. ये देखकर उसके पिता को बड़ा आश्चर्य हुआ. आख़िरकार उन्होंने ये सोचा कि इस लड़के को भगवान ने मेरी कन्या के लिये ही निर्माण किया होगा. यह सोचके उन्होंने मेरी उससे शादी करदी.

उस परीकन्या के साथ मेरी शादी होते ही कुछ दिन मजे से गुजारने के बाद मैं अपनी भार्या के साथ शहर वापस आ गया!

सनोबर बादशहाने अपनी हकीकत कहते हुये कहा. ‘हे युवा वो मेरी प्रिय पत्नी ये जंझिर में जखड़ी हुयी गुल ही है.

उसके ये आखरी शब्द सुन शहजादे को आश्चर्य का धक्का लगा.  अब आप सोचते होंगे की Gul Sanobar Story In Hindi की कहानी के आखिर मे  गुल के साथ यह अन्याय क्यों हो रहा है? बस यही सवाल शहजादे सता रहा था की आखिर सनोबर बादशाह की इस प्रिय गुल के इतने हाल क्यू किये जा रहे है? आखिर ऐसा क्या गुन्हा किया था गुल ने जो इसे ऐसी सजा दि जा रही थी? अब यही तो असली रहस्य है!

> Read – वाफाक नगरी की तरफ – गुल और सनोबर पार्ट ५ की कहानी.
> Read – लातिफाबानु जादूगरनी के जाल मे – गुल ने सनोबर के साथ क्या किया पार्ट ६.
> Read – जमिलाबानु से मुलाकात- गुल सनोबर की हिंदी की कथा पार्ट ७.
> Read – दानवो के साथ युद्ध- गुल ने सनोबर के साथ क्या किया पार्ट 8.

इस प्रकार से हमने Gul Sarovar Ki Kahani पार्ट 10 को यही ख़त्म करते है. अब बचे Gul Sanobar Story In Hindi के पार्ट ११ की कहानी के लिए यहा क्लिक करे. आशा करते है आपको यह हिंदी कथा पसंद आयी होंगी, अगले पार्ट को सबसे पहले पढ़ने के लिए जल्दी से ब्लॉग को सब्सक्राइब करे. क्या आप अपने स्नेहीजनो को इस कहानी से खुश करना नही चाहेंगे तो चलिए जल्दी से सोशल मीडिया मे शेयर कर दीजिये.

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