Computer Security से जुड़े जरुरी तार जो हर किसी को पता होने चाहिए ! Virus तथा Malware की जानकारी. Computer Virus से जुडी जरुरी जानकारी.

कंप्यूटर हमारे जीवन मे बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. वह हर प्रकार के काम Simple और Confidential करने मे हमारी सहायता करता है. इसलिए हम अपने कंप्यूटर सिस्टम को Personal और Secure रखना चाहते है. ताकी कोई Invalid user इसका गलत इस्तेमाल ना कर सके, कोई Malware या वायरस भी Computer Security System को नुकसान न पहुचा सके. इसी लिए एक छोटीसी Computer Virus Help आपको इस आर्टिकल के माध्यम से अवश्य मिलेगी.Computer Security Virus Ki Jankari.

Computer Security को Cyber Security या IT Security के नाम से भी जाना जाता है. यह एक Information Technology की एक ब्रांच है जिसे खासकर कंप्यूटरो की Web Security के लिए ही बनाया गया है. इससे कंप्यूटर सिस्टम तथा Deta जिसे यह Store या Access करते है उनकी सुरक्षा करती है. क्या आप जानते है यह सुरक्षा प्रधान करने के लिए कौनसे तरीके इस्तेमाल किये जाते है? चलिए जानते है उन तरीको के बारे मे.

> जरुर पढ़े – इन्टरनेट कनेक्शन टाइप्स की जानकारी जो सभी को होनी चाहिए.

Computer Security के लिए इस्तेमाल होने वाले चार तरीके.

Computer System Security के लिए अक्सर चार चीजे इस्तेमाल की जाती है जो निचे दिए अनुसार है.

  • System Access Control.

सिस्टम एक्सेस कण्ट्रोल एक एसी प्रणाली है जो किसी कम्प्यूटर मे डेटा का इस्तेमाल या उसमे कुछ बदलाव करने की अनुमती प्रधान करती है. आम तौर पर एक यूजर किसी Computer System या Network Security मे लॉग इन करता है, जिसके बाद एक्सेस कण्ट्रोल तय करता है की उस User के लिए कौन सा डेटा पहुचाना चाहिए और कौनसा नही.

  • Data Access Control.

कौनसा डेटा कौन नियंत्रित कर सकता है? इस बात की निगरानी इस कण्ट्रोल के तहत की जाती है. Computer System किसी भी व्यक्ति विशेष, Files तथा अन्य किसी भी Objects Security के स्तर पर आधारित होकर ही एक्सेस नियमो को बनाता है.

  • System & Security Administration. 

सिस्टम और सिक्यूरिटी एडमिनिस्ट्रेशन के अंतर्गत ऑफलाइन प्रक्रिया का Performance होता है जिसमे कोई भी Computer System या तो सिक्योर बनाया जाता है या फिर उसकी सिक्यूरिटी को तोड़ा जाता है.

  • System Design.

सिस्टम डिजाईन यह कंप्यूटर के Hardware And Software की Basic Protection की विशेषताओ से लाभ लेती है. आपने इस तरह अब यह जान लिया है की Computer Security के लिए कौनसे तरीके इस्तेमाल किये जाते है. क्या आपको कंप्यूटर सुरक्षा से जुड़े घटकों के बारे मे पता है? जानते है उनके बारे मे जो निचे दिए गए है.

Components Of Computer Security.

कंप्यूटर सिक्यूरिटी कई प्रकार के Core Areas से जुड़े होते है जिनके बारे मे जानकारी हर किसी को होनी चाहिए.

  • Confidentiality.

किसी भी Information, Data की तरह अन्य जानकारी Hackers द्वारा हैक ना कर ली जाए इसी लिए गोपनीयता ली जाती है जो इसके अन्दर आती है.Computer Security Hacker Information.

  • Non-Repudiation.

मेसेज को भेजने वाला ओरिजिनल व्यक्ति कही अपने सन्देश को खुद अपना होने से इनकार न कर दे, इस प्रकार की कन्फर्मेशन को ही नॉन-रेपुडिएशन कहते है. लेकिन इसके अंतर्गत आने वाले कुछ पॉइंट्स भी आपको जानने चाहिए.

Authentication.

प्रमाणीकरण यह Computer System को इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को Valid और Invalid होने की कन्फर्मेशन करता है.

Access Control.

जिस यूजर को जिस संसाधनों का इस्तेमाल करने की अनुमति आज हो वह केवल उन्ही संसाधनों को इस्तेमाल करे. इस बात की सुनिश्चितता को एक्सेस कंट्रोल कहते है.

Availability.

सभी सिस्टमो के कार्य करणे की प्रणाली का सही होना और किसी भी Valid User को Services देने से न मना करना. इस बात को अवैलिबिलिटी  के नाम से जाना जाता है.

Cryptography.

किसी Information को छिपाकर या Secret ways से लिखने की तकनीक को क्रिप्टोग्राफी कहा जाता है. इसके माध्यम से इंटरनेट पर Data Transmission के दौरान डेटा को सिक्योर रखा जाता है. लेकिन Cryptography मे इस्तेमाल होने Common Elements भी सात प्रकार के होते है जो निचे दिए गए है.

> जरुर पढ़े – Operating System क्या है? ऑपरेटिंग सिस्टम्स के प्रकार..

  1. Plain Text- यह Input Form के रूप में दिया जाने वाला Original message होता है.
  2. Cyber- इसमें बिट बाय बिट या कैरेक्टर बाय Character Changes करने की प्रक्रिया है, जिसमे सन्देश का अर्थ नही बदलता.
  3. Cyber Text – यह कोडेड संदेश या Encrypted data होती है जिसे User सीधे सीधे नही पढ़ सकता.
  4. Encryption-प्लेन टेक्स्ट को Cyber Text में परिवर्तन करने की प्रक्रिया को इन्क्रिप्शन कहते है.
  5. Decryption- यह इन्क्रिप्शन प्रक्रिया का रिवर्स होता है अर्थात इसमें सायफर टेक्स्ट को इन्क्रिप्शन टेक्स्ट में परिवर्तन किया जाता है.
  6. Stenography-  सन्देश को उसके अस्तित्व सहित छुपाने की कला को स्टेनोग्राफी कहते है. यह Data privacy और Integration में मदत करता है.
  7. Integrity- यह सुनिश्चित करता है कि सुचना को किसी अयोग्य व्यक्ति द्वारा इस प्रकार बदला तो नही गया है जैसे वैध व्यक्ति द्वारा भी पहचाना न जा सके.एकीकरण Computer Security का एक अत्यंत सुरक्षित घटक है.

PC Protect करने मे कौनसे Components अपना काम करती है यह तो आपने जान लिया, लेकिन क्या आप जानते है Computer Information Security को आघात करने वाले Sources कौनसे होते है? यहा से अब Computer Safety के बारे मे और भी अधिक जरुरी जानकारी शुरू होगी जो आपको Computer Security Threats के बारे मे अवगत कराएगा.

 Source Of Cyber Attacks.

कंप्यूटर पर मुख्य रुप से सबसे बड़ा Attacker Virus Program है. Computer Virus एक छोटा Software Program है, जोकि एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में फैलता है तथा Computer operations में भी हस्तक्षेप करने की क्षमता रखता है. इस प्रकार के आक्रमण के Source निचे दिए गए है जो अच्छीसे अच्छी Internet Network Security तक को तोड़ देता है .

  • Downloadable Program,

डाउनलोडेबल फाइल्स वायरस का सबसे प्रमुख तथा Possible Sources है. किसी भी प्रकार की Executable File, जैसे-Games, Screen Service इत्यादीं इसके प्रमुख दरवाजे है. यदि आप किसी Programme को इंटरनेट से Download करना चाहते है तो डाउनलोड करने से पहले उस प्रोग्राम को Scan करना आवश्यक है.

  • Cracked Software,

ये Software Virus Attacks का अन्य स्त्रोत है. इस प्रकार के क्रेकड सॉफ्टवेर में वायरस तथा Bugs, के होने की संभावना ज्यादा होती है. जिन्हें ढूंढकर Computer System से दूर करना बेहद कठिन है. इसलिये Internet से किसी भी सॉफ्टवेर को Reliable Source
से ही डाउनलोड करना चाहिये.

  • Email Attachments,

यह Attachments वायरसों के मुख्य दरवाजे होते है. इन ई-मेल को आसानी से हैंडल किया जा सकता है.

  • Internet,

सभी कंप्यूटर्स के यूजर्स Virus Systems पर अटैक से Unconscious होते है. इंटरनेट पर Available Film या Download इत्यादि तत्व ही वायरस को फैलाने में उत्तरदायी होते है. इन्टरनेट द्वारा कई तरह वायरस आते है जो हर तरह की Computer Network Security को तोडती है.

  • Booting From Unknown CD / DVD.

जब भी कंप्यूटर काम नही कर रहा होता है उस समय Computer मे पढ़ी CD को निकाल लेना ही ठीक माना जाता है. यदि हम वह नही निकालते है तो यह खुद ही Disc मे Boot होने लगती है, जिससे Virus Attack की संभावना बढ़ जाती है. कंप्यूटर सिक्यूरिटी के लिए और भी कितने खतरे होते है यह आपको पता होने चाहिए वर्ना हाल ही हुए Ransomware जैसे वायरस अटैक्स रोकना मुश्किल हो जाता है. क्या आप जानते है Virus Types कितने होते है? अगर नही तो आप सभी वायरस के प्रकार के बारे मे निचे की जानकारी से जान सकते है.

> जरुर पढ़े – Net Protector Antivirus ऑफलाइन Update कैसे करते है?

Type Of Viruses.

  • Virus,

वायरस वह प्रोग्राम है जो कंप्यूटर पर Negative Effect डालते है. यह PC पर कण्ट्रोल हासिल करके उनसे असामान्य और विनाशकारी काम करवाते है. यह खुद ही Computer System मे कॉपी कर लेते है और आगे संक्रमण हेतु एनी प्रोग्रामो के साथ स्वता ही जुड़ जाते है.

Virus कंप्यूटर सॉफ्टवेर के किसी भी हिस्से जैसे Boot Block, Operating System, System Area, Files तथा अन्य Application Programs इत्यादि को नुकसान पंहुचा सकता है. उन सभी वायरस के प्रकार निचे दिए गए है.

  • Direct Action Virus,

इस तरह के वायरस फाइल मे होते है और जब उस फाइल का इस्तेमाल किया जाता है तब यह Virus स्वयं को Activate कर देता है. यह केवल उन्ही फाइलों को Infected करता है जिनके फ़ोल्डर्स Autoexec. bat फाइल पर Described होते है जैसे Vienna Virus.

  • Over Right Virus,

इस तरह के वाईरसेस इन्फेक्टेड फाइलों मे रखे हुए डेटा और information को डिलीट कर देते है जैसे Way, Trivial, 88-D etc.

  • Macro Virus,

मैक्रो वायरस केवल उन्ही एप्लीकेशन तथा प्रोग्राम्स को संक्रमित करता है, जिनमे Doc, Xls, Pps वगैरा मैक्रोस होते है.

  • Boot Sector Virus,

बूट सेक्टर वायरस को ही Boot Record Virus भी कहा जाता है. यह सामान्यता कंप्यूटर के बूट अप होने पर फैलता है. क्योकि यह Hard Disk या Floppy Disk के मास्टर बूट रिकॉर्ड के बूट सेक्टर मे होता है.

  • File System Virus,

यह किसी भी फाइल के Directory Path को बदलकर Memory Management मे गड़बड़ कर देता है. इसे Cluster Virus या Directory Virus भी कहते है. जैसे उदहारण के तौर पर Dir-2 Virus etc.

  • Polymorphic Viruses,

पोलीमर्फिक वायरस जब भी किसी सिस्टम को इन्फेक्टेड करता है तो अपने आपको हर बार Encode या Encrypt करता है. इन प्रकार के वायरस की ज्यादा से ज्य्दादा कॉपी तैयार हो जाती है. जैसे उदहारण के तौर पर ElKern, Tuareg वगैरा.

  • FAT Virus,

फैट वायरस फाइल की लोकेशन को Unused Memory Place के बारे मे सभी प्रकार की जानकारियो को संगृहीत करने के लिए इस्तेमाल होता है इसका उदहारण है लिंक वायरस इत्यादि.

  • Web Scripting Virus,

कई Websites मे रोचक सूचि को डालने के लिए कठिन कोड का इस्तेमाल होता है यह इन्ही कोड्स को इन्फेक्टेड बनाते है जैसे J.S. Fort Night etc.

  • Multipartite Viruses,

मल्तिपाईट वायरस कई तरीको से फैलता है, जैसे Operating System Installed करने पर आदि. इसका उदाहरण आप Filp ले सकते है.

  • Resident Virus,

रेजिडेंट वायरस अपने आप को System memory को स्थिर कर लेता है तथा ऑपरेटिंग सिस्टम के चलने पर एक्टिव हो जाता है और खोले जाने वाली सभी फाइल्स को प्रभावित करता है. यह RAM मे छुपा हुवा होता है तथा Malicious Code के परफॉरमेंस के बाद भी वही रहता है. क्या आप मुख्य कंप्यूटर वायरस के बारे me  जानते है जो Computer System मे अक्सर पाए जाते है.

Computer System के प्रमुख वायरस. Latest Computer Virus Names In Hindi.

  • Worms,

Computer Security मे Warm एक अकेला Malware Program एसा है जो की दुसरे कंप्यूटरस मे अपने आप को फ़ैलाने के लिए कॉपी करता है. वोर्म्स को ढूंड पाना बेहद कठिन है, क्योकि यह अदृश्य फाइल्स के रूप मे होते है. कई तरह के Worm Virus Removal मार्किट मे उपलब्ध है जिन्हें इस्तेमाल कर आप आपके Computer Security Secure कर सकते है.

  • Trojans.

Trojan को ही Trogan Horse भी कहते है. एक प्रकार का नॉन शेल्फ replicating malware है, जो की किसी भी Desired work पूरा करते हुए दिखता है पर ये यूजर के Computer System पर Unauthorized Access की सुविधा प्रधान करता है. यह Computer Virus के भाती अपने आप दूसरी फाइलों मे सम्मिलित करने का प्रयास नहीं करते. यह सॉफ्टवेर Internet-enabled applications द्वारा टारगेट कंप्यूटरस तक पहुच सकते है.Computer Security Malware Ki Jankari.

  • Spyware.

स्पाईवेयर प्रोग्राम किसी भी Computer System पर Installed होता है. जो की सिस्टम के मालिक की सभी गतिविधियो की निगरानी तथा गलत तरीके से आगे इस्तेमाल होने वाली सभी जानकारियों को एकत्रित करता है. इनका प्रयोग हम Legal और illegal Purpose के लिए कर सकते है. Anti Spyware पर्सनली इनफार्मेशन को दुसरे व्यक्ति के कंप्यूटर पर Internet से Transmitted कर सकते है जो Information System Security के खतरा होती है. अगर आप वायरस के प्रभाव और Malware Attack के बारे में नहीं जानते है तो यह एक सुंदर अवसर है आपको यह जान लेना चाहिए.

> जरुर पढ़े – Net Protector Antivirus इनस्टॉल कैसे करते है?

Effects Of Virus.

कंप्यूटर पर वायरस विभिन्न प्रकार के प्रभाव डाल सकते है. यह Virus Types पर Depend करता है की वह क्या असर करेंगे, कुछ वायरस के प्रभाव एक प्रकार है.

इस्तेमाल करने वाले यूजर की निगरानी करना.

  1. Computer System Security को कम करना.
  2. Local Disk पर उपस्थित All Data को Destroy करना.
  3. Computer Networks और Internet Connection को प्रभावित करना.
  4. Memory Size को बढ़ाना या कम करना.
  5. विभिन्न प्रकार के Error Massages को Display करना.
  6. PC Settings या firewall security को बदलना.
  7. Unwanted Advertise को प्रदर्शित करना.
  8. Boot Time को बढ़ाना etc.

इस तरह के कई प्रभाव हमें कंप्यूटरस पर देखने को मिलते है इसी प्रकार मैलवेयर दोष के लक्षण भी देखे जाते है जो निचे दिए गए गे.

Symptoms Of Malware Attack.

किसी भी कंप्यूटर सिस्टम के मैलवेयर अटैक होने पर निचे दी गयी क्रिया होती जिसके द्वारा समज सकते है की यह malware के लक्षण है.

  1. Mismatch Massages को कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाना.
  2. कुछ Files का को जान.
  3. सिस्टम का धीरे चलना.
  4. PC Crash होकर बार-बार Restart होना.
  5. Mouse Pointer का Graphic बदलना.
  6. Drives Access सही से ना होना.
  7. Antivirus जैसे Network Security Software  का Implementation या installation ना होना.

इसके बाद और भी कई बाकी के अन्य खतरे आपकी Computer Security Systems के लिए खतरे उत्पन्न कर सकती है जो निचे दी गयी है.

Computer Security के लिये कुछ अन्य खतरे.
  • Spoofing.

अनधिकृत डेटा को उसके अधिकृत उपयोगकर्ता की जानकारी के बिना एक्सेस करने की तकनीक को स्पूफिंग कहते है. यह नेटवर्क पर Different resource को एक्सेस करने के लिये भी इस्तेमाल होती है. IP Spoofing भी इसका प्रकार है.

  • Salami Techniques.

इसके अंतर्गत सिस्टम द्वारा संभाली गई बढ़ी धनराशी के एक बड़े हिस्से से छोटे हिस्से को अलग किया जाता है.

  • Hacking.

नेटवर्क से जुड़े कंप्यूटर में घुसपैठ करने की Process को हैकिंग कहते है. Hacking DOS Attack (denial of service) का परिणाम भी हो सकता है.यह कॉम्प्यूटर के सभी Resources को Valid Users द्वारा इस्तेमाल करने से दूर रखती है. इस प्रक्रिया को अंतिम चरम तक पहुंचने वाले व्यक्ति को Hackers कहते है.

  • Cracking.

यह कंप्यूटर में किसी भी प्रकार के Software या Software component को तोड़ने की प्रक्रिया है. इसमें Password Cracker, Trojans, Viruses, वार डायलर इत्यादीं Include है.

  • Phishing.

Computer sensitive information को धोखेबाजी से प्राप्त करने की कोशिश करना इत्यादीं विशेषताओ को फिशिंग कहते है. इसके अंतर्गत Passwords, Credit Card Details etc सम्मिलित है. यह एक प्रकार का Internet Fraud है, जिसमे User को बहकाकर उसके सभी credentials को प्राप्त कर लिया जाता है. यह ज्यादातर Online Shopping और Bank Details की धोकदडी मे देखा जाता है. hackers फिशिंग बिना Computer Security को तोड़े यूजर के मन मुताबिक ऑनलाइन धोकेबाजी कर लेते है.

  • Spam.

स्पैम एक प्रकार से Messaging System का दुरूपयोग है, जिसके अंतर्गत अनचाहे संदेशों को Email के रुप में भेजा जाता है.

  • Adware.

एडवेयर यह एक ऐसा Software Package है, जोकि एडवरटाइजमेंट को स्वतः ही टुकड़े टुकड़े कर स्क्रीन पर दिखाता है. बहुतसे अनचाहे Advertisements को दिखाने के लिये इस्तेमाल किया जाता है.

  • RootKits.

यह एक प्रकार का मालवेयर है जिसके द्वारा किसी कंप्यूटर सिस्टम में Administrative level की नियंत्रितता प्राप्त की जा सकती है और इसकी जानकारी किसी को भी नही होती है. रूटकिट्स को निकालना बहुत मुश्किल होता है. हमने इसके लिए Net Protector को हमारे Computer Security के लिए इस्तेमाल किया है फिर भी यह हात नहीं आता है. इतना ही नहीं  कभी कभी पूरी तरह से Operating System Re installation की भी आवश्यकता होती है. हा लेकिन इनसे बचने के लिए कुछ बेहतर सिक्यूरिटी पर ध्यान देना होता है जो निचे दी गयी है.

Solutions To Computer Security Threat.

कॉम्प्यूटर सिस्टम को Invalid User से बचाने के लिये तथा Computer Security बनाये रखने के लिए अभी तक कुछ Defense System जानकारों द्वारा बनाये गये है जोकि इस प्रकार है.

  • Anti Virus Software.

ये उस प्रकार का सॉफ्टवेर होता है जिनका प्रयोग कॉम्प्यूटर को वायरस, स्पाईवेयर, वॉर्मस, ट्रोजन इत्यदि से बचाना होता है. जिनका  कार्य  वायरस या अन्य मालवेयर को ढूंढकर खत्म करना होता है.

  • Digital Signature.

यह सिग्नेचर का डिजिटल रूप है जिसे प्रेषित किये गये संदेश को प्रमाणित करने के लिये प्रयोग किया जाता है तथा यह डॉक्यूमेंट के ओरिजिनल होने को भी सुनिश्चित करता है.

  • Firewall.

फ़ायरवॉल या तो सॉफ्टवेर या यो हार्डवेर आधारित हो सकता है, जोकी नेटवर्क को सुरक्षित रखने में सहाय्यताप्रद होता है. इसका प्राथमिक उपयोग इनकमिंग तथा आउटगोइंग नेटवर्क डेटा ट्रैफिक को पैकेट्स विश्लेषण द्वारा नियंत्रित करता है.फ़ायरवॉल में प्रॉक्सी सर्वर के साथ कार्य करना या सम्मिलित होना भी उल्लेखनीय है.ताकी यह नेटवर्क को सभी जरूरतों को वर्कस्टेशन यूजर्स के लिए पूरा कर सके.

  • Digital Certificate.

डिजिटल सर्टिफिकेट सिक्युरिटी उद्देशों के लिये इलेक्ट्रॉनिक संदेशों में प्रयुक्त होने वाली कॉफी है. डिजिटल सर्टिफिकेट किसे प्रेषित किया गया व किसने प्रेषित किया इत्यादि जानकारियां इसमें सम्मिलित होती है. अंत मे हमारे पाठको के लिए Computer Security से जुडी जानकारिया जो निचे दी गयी है.

Computer Security Related Information.

  • Proxy Server.

प्रॉक्सी सर्वर को प्रॉक्सी अथवा Application level gateway भी कहा जाता है. यह उपयोगकर्ता एवं सर्वर के मध्य कार्य करता है. यह नेटवर्क के सही एड्रेस को छुपाता है और नेटवर्क में आने जाने वाले सभी संदेशों को इंटरसेप्ट करता है.

  • Application Gateway.

अप्लीकेशन गेटवे यह कुछ विशिष्ट एप्लीकेशनों पर Computer Security Procedure को लागु करता है. इस विशिष्ट एप्लीकेशनों में File Transfer Protocol तथा Telnet Services इत्यादीं शामिल है.

  • Time Bomb.

चौकिये मत क्योकि टाइम बम यह भी एक सॉफ्टवेर का हिस्सा है, जोकि किसी विशेष समय पर Active होता है.

  • Logic Bomb.

हा लॉजिक बम यह भी एक कोड होता है, जिसे कंप्यूटर की मेमोरी में जान बूझकर डाला जाता है. यह अनुकूल परीस्थितियो के मिलते ही हानिकारक रुप से सक्रीय हो जाते है. ये कोड अपनी नकल तैयार करने में सक्षम नहीं होते है.

  • Patches.

पेचेस यह सॉफ्टवेयर का एक ऐसा भाग होता है जिसे उस सॉफ्टवेयर में सुधार करने के लिये  बनाया जाता है.

  • Masquerading.

इसमें Attacker Valid User वैध उपयोगकर्ता होने का अभिनय करता है और अवैध रुप से विशेषाधिकार प्राप्त कर लेता है.

  • Eavesdropping.

इसमें हमलावर संचरित होने वाले संदेशों के कंटेंट की निगरानी करता है.

  • Password.

यह एक प्रकार का Secret word या कैरेक्टर्स की स्ट्रिंग है जिसे उपयोगकर्ता को प्रमाणित करने में इस्तेमाल किया जाता है, ताकि उपयोगकर्ता की पहचान या Access Acceptance Verified को सत्यापित किया जा सके व संसाधनों के एक्सेस को प्राप्त किया जा सके. ध्यान रहे Passwords आपकी Computer Security मे भी बेहद अहम भूमिका निभाते है.

  1. Weak Password – कमजोर पासवर्ड आसानी से याद किया जा सकता है, जैसे की नाम, जन्म दिवस, फोन नंबर आदि.
  2. Strong Password – मजबूत पासवर्ड Alphabets और signals का कॉम्बिनेशन है जिसे तोड़  पाना बेहद मुश्किल है.Computer Security Malware Virus Important Info
  • File access permission.

अधिकांश  रुप से Current file system में अनुमति को प्रदान करने के कई तरीको के अधिकार होते है, जिन्हें केवल कुछ खास Users या Users Group ही एक्सेस कर सकता है. इसमें भी तीन विशेष Permission allowed है जिससे किसी भी सिस्टम की Computer Security Strong होती है.

  1. Read Permission- यदि आप को किसी फाइल को रीड करने की अनुमति है तो आप सिर्फ उसके कंटेंट्स को देख सकते है.
  2. Write Permission – यह उपयोगकर्ता की फ़ाइल के कंटेंटो को रिमूव या उसमे बदलाव इत्यादीं करणे की अनुमति देता है.
  3. Execute permission- यह Users की Files को मात्र Execute करने की अनुमति देता है.

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तो इस प्रकार से आप इस आर्टिकल के मध्यम से Special Computer Security जैसे Cyber Attacks Sources, कंप्यूटर सिक्यूरिटी के मुख्य घटक, Computer Virus Protection, Malware Protection की जानकारी और उनके प्रभाव के बारे मे जान चुके होंगे. आशा करते है आपको हमारा यह कंप्यूटर की सुरक्षा का यह पोस्ट पसंद आया होगा. आगे भी इसी प्रकार की बेहतरीन सिक्यूरिटी इनफार्मेशन पाने के लिए ब्लॉग को सब्सक्राइब करे तथा पोस्ट को सोशल मीडिया मे शेयर करना ना भूले.

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Comments

  1. By JITENDRASINGH RAO

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  2. By Kaushal Shaky

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