Computer के विभिन्न पार्ट्स जो सभी को जानने चाहिए – Computer Parts And Components की जानकारी.

Last updated on December 31st, 2017 at 06:34 pm

प्रिय पाठक, आपने पिछली पोस्ट मे पढ़ा Basic Komputer Knowledge और Computers Types कौनसे-कौनसे है. लेकिन आज आप इस आर्टिकल के माध्यम से वह कंप्यूटर स्ट्रक्चर की जानकारी जान पाएंगे जो बहुसे लोगो को नही पता होती है. बहुतसे Computer Parts Name एसे होते है जिन्हें रोज इस्तेमाल किया जाता है लेकिन उनकी पूरी जानकारी ही नही होती है, की वह कैसे काम करते है.Computer Parts and Comonents Ki Jankari In Hindi

PC And Parts दो अलग वस्तु जरुर है. लेकिन अलग-अलग Computer Parts और उनके बिच आनेवाले संबंध को Computer Structure कहते हैं. लगबग सभी कम्प्युटर की संरचना एकही तरह की होती है.

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Computer Parts के प्रमुख तीन भाग.

  1. इनपुट-आऊटपुट युनिट (Input Output Unit).
  2. सेंट्रल प्रोसेसिंग युनिट (Central Processing Unit).
  3. मेमरी युनिट (Memory Unit).

इनपुट युनिट द्वारा हम अपना डेटा या निर्देश अथवा प्रोग्राम कॉम्प्युटर में प्रविष्ट कराते हे.जो सीपीयू के द्वारा ग्रहण किया जाता है और मेमरी में उचित स्थान पर स्टोअर कर दिया जाता है आवश्यकता पडणे पर ए एल यू मेमरी से ही डेटा तथा निर्देश ले लेता हे, जहाँ कंट्रोल युनिट के आदेशानुसार उन पर विभिन्न क्रिया (Processing) की जाती है और परिणाम आऊटपुट युनिट को प्रेषित कर दिए जाते हैं या पुन्हा मेमरी में ही रख दिये जाते हैं अन्य सभी यूनिट्स कंट्रोल युनिट के नियंत्रण में कार्य करती हैं.

Primary Storage ए.ए.ल.यू. तथा कंट्रोल युनिट के संमिलित रुपको सेंटर प्रोसेसिंग युनिट या सीपीयू कहा जाता है.इनपुट युनिट द्वारा जहां हम अपनी बात कम्प्युटर तक पहुंचते हैं,वहीं आऊटपूट युनिट दौरा कम्प्युटर अपनी बात हम तक पहुंचता है.

  • Input Unit.

इन्पुट युनिट वो हार्डवेअर होते हैं जो डेटा कम्प्युटर को भेजते हैं.बिना इनपुट यूनिट के कंप्यूटर TV Screen की तरह दिखने वाली एक ऐसी डिस्प्ले यूनिट हो जाता है, जिससे उपयोगकर्ता कोई कार्य नहीं कर सकता है. इनपुट यूनिट का कार्य यह है कि हम अपनी भाषा में इसको जो डेटा या आदेश देते है.उसे ये बायनरी कोड (Binary code) से बदलकर सीपीयू में भेज देते है. संक्षेप में, इनपुट यूनिट द्वारा निम्न कार्य किये जाते है.

  1. यह उपयोग करता द्वारा दिए गए निर्देश तथा डेटा को पढ़ती या स्वीकार करता हे.
  2. यह निर्देशो और डेटा को कम्प्युटर द्वारा स्वीकार किए जाने वाले रूप में बदलती हैं
  3. यह बदले हुए रूप में परिणामों को हमारे समक्ष प्रस्तुत करता हे या छाप देता है.
  • Output Unit.

डेटा तथा Instructions के परिणाम के रूप मे Display करने के लिए जिन Units का इस्तेमाल किया जाता है, उन्हें Output Unit कहा जाता है. आउटपुट यूनिट का काम यह है की वह कंप्यूटर से प्राप्त होने वाले परिणामो को जो Binary Code मे होते है, हमारे लिए सही संकेतो या भाषा तथा Image मे बदलकर हमे उपलब्ध करता है. अगर आसान भाषा मे कहे तो Output Unit निचे दिए गए सभी कार्य करता है.

  1. कंप्यूटर द्वारा दिए गए परिणामो को स्वीकार करता है, जो की बायनरी कोड के रूप मे होते है और जिन्हें हमारे लिए समजना बेहद कठिन होता है.
  2. उन कोड के रूप मे दिए गए परिणामो को हमारे द्वारा पढ़ने या समजने योग्य रूप मे बदल देता है.
  3. बदले हुए रूप मे परिणामो को हमारे सामने Display करता है या छाप देता आप एसा भी कह सकते है.
  • Central Processing Unit.

CPU ही प्रोसेसिंग युनिट और कॉम्प्युटर का वह भाग होता है, जिसमें Arithmetic And Logical Operations (ॲरिथमेटिक और लॉजिकल ऑपरेशन्स) Executed होते हे तथा Instructions, Decode किये जाते है. CPU कंप्यूटर के सम्पूर्ण Operations को नियंत्रित करता है. Central Processing Unit को कंप्यूटर का मस्तिष्क कहा जाता है. माइक्रो कॉम्प्यूटर के सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को Micro Processor भी कहा जाता है. यह कॉम्प्यूटर के Output और Input Devices को कंट्रोल करता है. चलिए अब जानते है सीपीयू के प्रमुख कार्य कौनसे है.

  1. यह Data Instructions तथा डेटा को Main Memory से रजिस्टर्स में Transfer करता है.
  2. Instructions को क्रमिक रूप से Execution करता है.
  3. आवश्यकता पड़ने पर यह Output Data को रजिस्टर्स से मुख्य मेमोरी में ट्रान्सफर करता है.

इस प्रकार से सीपीयू क्रियाये करता है. अब देखते है विस्तार से की कौनसे अंग है.Computer Parts and Components Ki Jankari In Hindi.

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Main Computer Parts / CPU Main Parts.

  • अरिथमेटिक एंड लॉजिक यूनिट(Arithmetic And Logic Unit)- ALU.

जैसा की नाम से स्पष्ट है, Central Processing Unit के लिए सभी प्रकार की Arithmetic Functions (जोड़ना, घटाना, गुण करना तथा भाग देना) और Comparisons (दो संख्यावो में ये बताना की कौनसी छोटी या बडी या सम समान है.), ऐसी यूनिट में की जाती है. यह यूनिट कई ऐसे Electronic Circuits से बनी होती है, जिनमे एक और से कोई दो संख्याये भेजने पर दूसरी औऱ से उनका योग,अंतर,गुणनफल या भागफल प्राप्त हो जाता है.

इनमें सारी क्रियाये Binary Method में की जाती है. प्राप्त होनेवाली संख्यावो तथा क्रियाओ के परिणामो को अस्थाई रूप से स्टोर या रखने के लिय इसमें कई Special Bites होती है, जिन्हें Register कहा जाता है. रजिस्टर एक एसा Equipment है जिसमे Data Store किया जाता है. Registers बहुत Fast Speed वाली Temporary Storage Device है.

Memory Hierachy मे रजिस्टर का स्थान सबसे उँचा होता है और ये सीपीयू को किसी डेटा का उपयोग करने के लिए सबसे जल्द रास्ता देते हैं. किसी प्रोग्राम के Implementation को Intense Mobility Provide करने के लीये Registers का बहुत बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है.

  • Control Unit.

कण्ट्रोल यूनिट का कार्य सबसे महत्वपूर्ण होता है.यह सभी Computer Parts के कार्यों पर नजर रखता है और उनमें उचित समतोल बैठाने के लिए Order भेजता है. इसका सबसे प्रमुख और पहला काम यह है कि हम जिस Program का पालन कराना चाहते हैं यह उस Memory को क्रमशः पढकर उस का Analysis करता है और उसका पालन कराता हे. किसी आदेश का पालन सुनिश्चित करणे के लिये वह कॉम्प्यूटर के दूसरे सभी भागों को Proper instructions जारी करता है.

उदाहरण के लिये, मेमोरी को आदेश दिया जा सकता है कि वह कोई डेटा किसी Special Place पर Store कर दे या वहा से उठाकर ALU में भेज दे. कंप्यूटर के सभी भागों में तालमेल बनाकर प्रोग्रामो का ठीक ठाक पालन कराना इसी कण्ट्रोल यूनिट का दायित्व है.

इस प्रकार सीपीयू की सभी युनिटो द्वारा आपसी सहयोग से User द्वारा बताय गए कार्य किये जाते है. इसके लिए जब भी किसी Input की आवश्यकता होती है. वह किसी इनपुट यूनिट से भी लिया जाता है, और जो Results या Messages आते है उन्हें किसी Output Unit को भेज दिया जाता है.

  • Micro Processor.

सीपीयू किसी कंप्यूटर का मस्तिष्क होता है इसी के अंदर सभी गणनाये और प्रोसेसिंग की जाती है.इसको ही Processor भी कहा जाता है. माइक्रो कंप्यूटर्स के लिये जिस प्रोसेसर का उपयोग किया है उसे Micro Processor कहा जाता है इसी के द्वारा सभी कार्य किये जाते है. वैसे कभी-कभी जटिल गणनावो के लिये Math Processor भी लगाया जाता है.

माइक्रोप्रोसेसर एक Semiconductor Integrated Circuit पर बनाई गई Programmable Digital Electronic चीज है. जो किसी Central Processing Unit (सीपीयू) के सभी कार्य करती है. यह कॉम्प्यूटर का दिल व् मस्तिष्क होता है. यह केवल मशीनी भाषा ही समजती है. चलिए प्रोसेसर के नाम और इसके बारे मे थोड़ी दिलचस्प बात भी जान लीजिये .

-इंटेल 4004 (Intel 4004) पहला ऐसा माइक्रोप्रोसेसर हे, जिसके सभी पार्ट्स सीपीयू के एक ही चिप पर लिये गये.
-कुछ महत्वपूर्ण माइक्रोप्रोसेसर के नाम है- Intel Dual Core और Pentium IV etc.

  • Memory Unit.

मैमोरी कंप्यूटर का वह भाग है जो Data तथा Instructions को Store करता है. कंप्यूटर की मेमोरी Modern computers के मूल कार्यो में से Information Retention की सुविधा प्रदान करती है. यह CPU के Computer Parts का एक भाग होती है, और उसमें मिलकर पूरा कंप्यूटर बनाती है. Memory Unit के भी दो Parts होते है जिनके बारे मे आपको अवश्य जानना चाहिए.Computer Parts Randome Access Memory

  1. प्राथमिक मेमरी.
  2. सेकंडरी मेमरी.

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Primary Memory (प्राथमिक मेमरी).

इसे Internal Memory या Main Memory भी कहा जाता है. यह CPU से सीधे जुडी होती है. इसका अर्थ है कि सीपीयू इसमें Store किये गये निर्देशो को लगातार पढता रहता है और उनका पालन करता रहता है. इसके साथ ही कोई डेटा जिस पर सक्रियता से कार्य किया जा रहा है यह भी इसमें स्टोर किया जाता है.

Primary Memory में किसी समय चल रहे Program तथा उनके Input Data और Output को Temprory रुप से कुछ समय के लिये Store किया जाता है. जैसे ही उनकी आवश्यकता समाप्त हो जाती है, उन्हें हटाकर दूसरे डेटा या प्रोग्राम मे रखे जाते है. प्राइमरी मेमोरी का आकार सिमित होता है लेकिन इसकी Speed बहुत तेज होती है.अब देखते है प्राइमरी मेमोरी में कौनसे Instructions रखी जाती है.

  1. Process किये जाने वाला पूरा डेटा और उसको प्रोसेस करने के लिये Important Instructions जो Input Devices से प्राप्त किये गये होते है.
  2. प्रोसेसिंग के Intermediate Result.
  3. प्रोसेसिंग के अंतिम परिणाम. उन्हें Output Devices तक भेजे जाने तक Safe रखा जाता है.

Computer Parts की जानकारी को आप जितना Deeply पढ़ते जायेंगे उतना ही और ज्यादा समझते और उलझते भी जायेंगे जो आपके लिए अच्छा कारण बनता है. Primary Memory के भी दो प्रकार होते है चलिए जान लीजिये उनके बारे मे.

  1. Random Access Memory.
  2. Read Only Memory.
  • Random Access Memory.

रैंडम एक्सेस मेमोरी को RAM भी कहा जाता है. यह मेमोरी एक चिप होती है, जो Metal Oxide Semiconductor (MOS) से बनी होती है. हम इस Memory के किसी भी Location को चुनकर उसका इस्तेमाल सीधे ही किसी डेटा को स्टोर करने या उसमे से Data Read करने के लिए इस्तेमाल करते है.

Random Access Memory इसे Registers और उनसे जुड़े हुए Circuits से बनी होती है, जिनसे डेटा को वहा तक और वहा से Transfer करना आसान हो. इसे हर लोकेशन का एक Confirm Address होता है जिसकी सहायता से हम उस लोकेशन तक पहुच सकते है.

Ram मे भरी जाने वाली सुचनाये Temporary होती है और जैसे ही कंप्यूटर की बिजली चली जाती है या किसी कारण से बंद हो जाता है तो पूरी इनफार्मेशन जो मेमोरी मे स्टोर हुयी है नष्ट हो जाती है.

  • Read Only Memory.

इसे संक्षेप में Rom भी कहा जाता हैं. यह वह Memory है,जिसमे डेटा पहले से भरा जा चुका होता है .और जिसे हम केवल पढ़ सकते है,हम उसे हटा या बदल नही सकते, वास्तव में रोम चिप बनाते समय ही उसमें कुछ आवश्यक डेटा और प्रोग्राम लिख दिए जाते है,जो स्थायी होते है. जब कंप्यूटर की बिजली बंद कर दीं जाती हैं तब भी रोम चिप में भर दी गयी सुरक्षाएं बनी रहती है. रोम चिपों का इस्तेमाल सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे Calculator, Video Game, Digital Camera आदि में किया जाता हैं.

अधिकांश पर्सनल कंप्यूटरो में Rom Memory के बहुत उपयोग होते हैं. इनमें ज्यादातर ऐसी सूचनाएं स्टोर की जाती है, जिनको बदलने की आवश्यकता नही होती. जैसे कंप्यूटर को Boot करने वाला प्रोग्राम, पुराने पर्सनल कंप्यूटरो में रोम मेमोरी में Basic Input, Output System (BIOS) भी स्टोर किये जाते है. जो Computer Hardware और Operating System  के बीच Translator का कार्य करते है.

Secondary Memory.

इस प्रकार की मेमोरी पिसी से बाहर होति है,इसीलिए इसे बाह्य (external)या द्वितीयक मेमोरी भी कहा जाता हैं.कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी बहुत महंगी होने तथा बिजली बंद कर देने पर उसमे रखी अधिकतम सूचनाएं नष्ट हो जाने के कारण हम उसे न इच्छा नुसार बढ़ा सकते हैं,और न हम उसमें कोई सूचना स्थाई रूप से स्टोर कर सकते है,। इसीलिए हमे सहायक मेमोरी का उपयोग करना पड़ता है.

इसकी कीमत तुलनात्मक दृष्टि से बहुत कम और डेटा स्टोर करने की क्षमता (capacity) बहुत अधिक होती है. इसमें एक ही कमी है की इन माध्यमो में डेटा को लिखने (अर्थात स्टोर करने) तथा पढ़ने (अर्थात प्राप्त करने) में समय बहुत लगता हैं. इसीलिए हम इसमें ऐसी सूचनाएं भंडारीत करते है,जिन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखना हो, तथा जिनकी आवश्यकता लगातार नही पड़ती हो.

सहायक मेमोरी का उपयोग बैकअप (backup) के लिए किया जाता है. जब हमें किसी डेटा की तत्काल आवश्यकतानही रहती, तो उसे किसि चुम्बकीय माध्यम जैसे फ्लापी डिस्क या चुम्बकीय टेप वर नकल करके अलग सुरक्षित किया जाता है. ताकि उस पर ऐसा डेटा भरा जा सके,जिसकी आवश्यकता पड़ रही हो.और डिस्क पर जगह न हो.बैकअप साधन में भंडारित किये गए डेटा को आगे कभी आवश्यकता पड़ने पर हार्डडिस्क पर उतारा या नकल किया जा सकता है.

प्रारंभिक कंप्यूटरो में Punched Card, पेपर टेप तथा Magnetic Taps का प्रयोग Assistant store के लिए किया जाता है. लेकिन आज कल मुख्य रूप से Magnetic discs का प्रयोग इस कार्य हेतु किया जाता है जो कही प्रकार से सुविधाजनक है.

  • Motherboard.

एक Computer System के विभिन्न बोर्डो में सर्वाधिक महत्वपूर्ण मदर बोर्ड या मेंन बोर्ड होता है. वर्ष १९७४ में माइक्रो कंप्यूटर के निर्मान के प्रारंभ से ही उनके सभी Important Electronic Computer Parts को एक ही छपे हुए सर्किट बोर्ड पर लगाया जाता है. जिसे मदरबोर्ड कहा जाता है. Computer Motherboard Parts मे कुछ पार्ट इतने छोटे होते है की उन्हें हाथ लगने से भी वह Used Computer Parts ख़राब हो सकते है.Computer Parts Motherboard

मदरबोर्ड किसी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम जैसे मॉडर्न कंप्यूटर का Central या Main Circuit Board होता है, इसे मुख्य बोर्ड (Main board), बेसबोर्ड (Baseboard), सिस्टम बोर्ड(System board), लॉजिक बोर्ड (Logic board) जैसे अलग-अलग नामो से भी जाना जाता है.

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आशा करते आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा. आगे भी आपको इसी प्रकार से धीरे-धीरे Computer Full Parts की जानकारी हो जायेंगे आप सिर्फ ब्लॉग को सब्सक्राइब करे और डेली कंप्यूटर आर्टिकल को पढ़ते रहिये. हम सभी प्रकार के Computer Parts And Names को हमारे आर्टिकल्स मे कवर करते है जो आपकी नॉलेज बढ़ाने मे मदत करेगा.

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Comments

  1. By Mahipal M

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