Chatur Khargosh Lambkarn Aur Darpok Hathi ChaturDatt Ki Behatareen Hindi Kahani

Last updated on December 12th, 2017 at 10:57 am

प्रिय पाठक, स्वागत है आपका हिंदी कहानी संग्रह की आज की Chatur Khargosh Lambkarn Aur Darpok Hathi ChaturDatt Ki Behatareen Hindi Kahani पर. सुंदरबन के तालाब के पास बहुत से खरगोशो के बिल थे. वे सब बड़े चैन से रहा करते थे. एक बार हाथियों का झूंड उस तालाब की और आ निकला. तालाब की और आते देख वे पानी मे इस तरह कूड़े, जैसे उन्होंने जैसे उन्होंने कभी पानी देखा ही ना हो.Chatur Khargosh Ki Sujbuj Aur Chaturadatt Ki Kahani

वे जी भरकर नहाये, जैसे बरसो की प्यास बुझाई हो और पानी से बाहर निकले. ख़ुशी से चिंघाडते हुए वे तालाब के आसपास घुमने लगे. इस बिच न जाने कितने खरगोश उनके पांवो के निचे आ गए. किसी का पैर टुटा, किसी की गर्दन टूटी, तो किसी का सर कुचल गया. खुच बिचारे तो अपने प्राणों से भी हाथ धो बैठे.

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हाथियों के बातचीत से पता चला की वे किसी दुसरे वन से आये है. जहा बरसात न होने से सारे तालाब सुख गए है. हाथियों के राजा चतुरदत्त ने अपने साथियों से कहा- ‘यह तालाब सुख गए है. अपनी प्यास बुझाने के लिए अब हम प्रतिदिन यही आया करेंगे.

झूमते-झूमते हाथी वापस चले गए! लेकिन चतुरदत्त की बात उस तालाब के किनारे बसे हुए खरगोशो ने सुन ली थी. उनकी तो मानो जान ही सुख गयी थी. कहा पर्वत सा हाथी और कहा पिद्दी सा, छोटा सा खरगोश. इस तरह तो रोज बहुतसे खरगोश मारे जायेंगे और एक दिन एसा आएगा, जबकी एस तालाब पर खरगोशो का नामोनिशान भी न रहेगा सारे कुचल दिए जायेंगे.

सारे के सारे खरगोशो ने बैठकर सोचने लगे की आखिर अब करे क्या? सोचते हुए उनके कान और भी तन गए, खड़े हो गए. उनमे से एक के कान सबसे अधिक लम्बे थे वह बहुत Chatur Khargosh था और उसका नाम था लम्बकर्ण.

जब सोचते-सोचते सब थक गए, तब उन्होंने लम्बकर्ण की और देखा. उन्होंने एक आवाज मे कहा- “अब तो चतुर लम्बकर्ण ही कोई उपाय सुझा सकता है हमें तो कुछ भी सूज नही रहा है”.

तभी लम्बकर्ण के कान हिले क्योकि उसे एक उपाय सूझ गया था. तभी उसने अपने सभी खरगोश साथियों को अपनी चाल बताई. सबने ख़ुशी-ख़ुशी हामी भरते हुए अपने कान हिलाते हुए लम्बकर्ण जैसे Chatur Khargosh की चाल पर अपनी सहमती जताई.

अपनी योजना को आजमाने के लिए लम्बकर्ण शाम होते ही उस रस्ते पर चल पढ़ा. जिस रास्ते से हठी आये थे. कूदते-फांदते वह हाथियों के रहने के स्थान पर जा पंहुचा.

एक टोले पर चड़कर लम्बकर्ण ने आवाज लगाई- “चतुरदत्त तुम्हे चंद्रतल पर आने से डर नही लगा मुर्ख! भला चाहते हो और अपनी जान बचाना चाहते हो तो यहा से चुप-चाप चले जाओ.

एक खरगोश के मुह से अपने लिए ‘मुर्ख’ शब्द सुनकर तो चतुरदत्त को बेहद गुस्सा आया वह बेहद क्रोध मे आ गया, पर मन ही मन थोडा डर भी गया. चतुरदत्त सोचने लगा भला कोई साधारण चिल्लुसा खरगोश मुझ जैसे विशालकाय हाथी को कैसे मुर्ख कह रहा है.

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उसने अपने स्वर मे फिर भी डरते-डरते रौब कायम रखते हुए पुचा- ‘तुम कौन हो बे चिंगुर’. लम्बकर्ण बोला मै चन्द्रमा का दूत हु, चन्द्रमा ने तुम्हे समजाने के लिए मुझे भेजा है.

क्या कहा है चन्द्रमा ने मेरे लिए!’

कहा है, तुमने आज अपने साथियों के साथ मेरे ही तालाब पर आकर मेरे बहुतसे प्यारे खरगोशो को मार डाला है. मेरी प्रजा के साथ एसी हरकत करके तुमने ठीक नही किया. भला चाहते हो तो आकर मुझसे माफ़ी मांगो और सुन्दर वन को सदा के लिए छोड़कर चले जाओ.

थर-थर कांपता हुवा विशालकाय चतुरदत्त बोला- ‘कहा है महाराज चन्द्र’? अब हमारा क्या करोगे?

मुझे उसने क्षमा मांगने के लिए कहा चलना होगा लम्बकर्ण जी..?

हाथी के मुह से अपने लिए जी शब्द सुनकर लम्बकर्ण को बड़ा मजा आया. लेकिन ऊपर से गंभीर होकर बोला- ‘इस समय घायलों की पूछताच करने के लिए महाराज चन्द्रमा अपने तालाब पर ही आये हुए है. क्षमा मांगने के लिए तुम्हे वही चलना होगा.

डरता-कांपता हाथी Chatur Khargosh Lambakarn के साथ चल पड़ा. तालाब पर पहुचकर खरगोश ने पानी मे पड़ते चाँद की परछाई चतुरदत्त को दिखाई और बोला – ‘वह देखो, थके होने के कारन महाराज आराम कर रहे है. चुपचाप उन्हें प्रणाम करके और क्षमा मांगकर यहाँ से नौ-दो गयारह हो जाओ, इससे पहले वह जाग जाये और उन्हें क्रोध आ जाये.

हाथी ने सर झुकाकर प्रणाम किया और फिर कभी उस तालाब पर न आने का वादा कर वहा से ऐसा भागा की फिर कभी उसकी सूरत भी वहा दिखाई ना पढी. बड़ो का नाम लेने से बहुत लाभ हो जाता है. जैसे चन्द्रमा का नाम लेने से ही सारे खरगोश एक बड़ी भारी विपत्ती से बच गए.

सिख – शक्ति से अक्ल बड़ी होती है इसीलिए हमेशा दिमाग का इस्तेमाल ज्यादा करे. किसी पर भी बरोसा करने से पहले उस बात की पक्की खबर जरुर निकाले.

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इसप्रकार से Chatur Khargosh की बूद्धिमानी से सभी खरगोशो की जान बच गयी. आशा करते है चतुर लम्बकर्ण और चतुर्दत्त हाथी की बेहतरीन Hindi Story आपको पसंद आयी होगी. अगर आपके पास भी इसी प्रकार की मजेदार कहानिया है और आप हमसे शेयर करके आपके मनपसंद HindiMePadhe ब्लॉग पर प्रसिद्द करना चाहते है तो कहानी भेजने के लिए हमसे Contact लिंक से संपर्क करे और आपकी लिखी हिंदी कथा पेस्ट करके भेजदे.

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