भुत प्रेत आत्मा का बदला जान निकालने तक पीछे पढ़ा रहा हताहत का प्रेत.

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क्या कोई भूत प्रतिशोध लेता है? क्या कोई प्रेत किसी का बदला एसा लेता है जो सीधे मृत्यु की गोध मे सुला दे? कभी एसा सुना है की भुत प्रेत aatma ka badla पूरा होने तक वह दम नहीं लेती?

आपने कई भुत की फिल्मे इससे पहले देखी होगी. आपको उनमे कुछ कई अधिक horror लगी होंगी तो कोई थोड़ी कम भुतिया लगी होगी । ज्यादातर फिल्मो में ही सुना होगा की चुड़ैल, डायन, प्रेत, आत्मा बदला लेती है।

Hatahat Pret Aatma KA Badla
Hatahat Pret Aatma KA Badla

लेकीन चौकाने वाली बात तो यह है की एसी bhut pret aatma ka badla वास्तव में भी घट चूका है. जी हा आपके सामने एक एसी ही paranormal activities लगने वाली कहानी घटी है।

हताहत का प्रेत Aatma Ka Badla Horror Kahaniya.

बंबई के अपराध जगत मे मशहूर आर्थर रोड जेल में 5 जुलाई 1970 को सनसनी फैल गईए, रात के 10:30 बजे अचानक एक कैदी सुबैया चिल्लाने लगा- ‘नही, नही। मुझे छोड़ दो, मुझे माफ़ कर दो चंद्रप्पा’।

सिपाही दौड़े हुए आये, उन्होंने देखा सुबैया धरती पर लोटता फिर रहा था, मानो कोई उसे बुरी तरह से मार रहा हो। वह सिपाइयो को देखकर चिल्लाने लगा-“मुझे बचा लो वरना चंद्रप्पा का प्रेत मेरी जान ले लेगा।

इस बीच बाकी कैदी दीवार से सटे हुए, भयभीत अवस्था मे सुबैया को चीखते हुए देख रहे थे।

6 अप्रैल, सन 1970 ई.को पुलिस ने बाकायदा सुबैया को न्यायिक हिरासत में लिया था। पुलिस ने आरोप पत्र के साथ एक कंकाल की बरामदगी भी दिखाई थी।

वैज्ञानिक जांच-पड़ताल के पश्चात पता चला था कि वह कंकाल 2 सितंबर, 1969 ई.से अपने घर से लापता 32 वर्षीय युवक चंद्रप्पा का ही था। स्वयं मृतक की पत्नी मालती ने इसकी तसदीक भी की थी।

पुलिस सब इंस्पेक्टर अरुण खेत ने अदालत को बताया कि 27 मार्च, सन 1970 ई.को शाम के समय थाना धारावी मे स्वयं मृतक चंद्रप्पा नायर के भूत ने आकर अपनी हत्या की प्रथम सूचना report लिखवाई थी।

मरने वाले ने अपनी हत्या का पूरा ब्यौरा और लाश के पाए जाने की जगह बताने की अतिरिक्त यह भी बताया था कि उसकी हत्या किसने की थी।

सब इंस्पेक्टर का बयान-

मैने उस रोज अचानक ही करीब 32-33 साल के एक युवक को थाने में भीतर आते देखा। थोड़े वार्तालाप के पश्चात, जब मैंने उससे पूछा कि क्या वह चंद्रप्पा है, तो वह मंद-मंद मुस्कुराने लगा।

पूछने पर बोला कि, अब तक मेरी आत्मा भटक रही थी। आज मैं आपके पास अपनी हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराने आया हु।

“उसने बताया कि 2 सितंबर, सन 1969 ई.को सीताराम मिल्स में, जहा वह काम करता था, दोपहर दो बजे उसका साथी सुबह सुबैया नायर उससे मिलने आया। उसने मुझे बांद्रा रेलवे स्टेशन पर दावत और आवश्यक बातचीत के लिए बुलाया।

स्टेशन से भाड़े की टैक्सी करकर हम दोनो धारावी रोड पर जैस्मिन मिल्स गए। वही सुबैया का शराबखाना था। जहा हमने रात के एक बजे तक खूब शराब पी।

जब मैं नशे में धुत्त छप गया, टैब सुबैया ने छुरा निकालकर कहा कि चंद्रप्पा, तेरा खेल खत्म। आज मुझे जिंदा नही छोडूंगा।

Bhut Pret Aatma Ka Badla
Bhut Pret Aatma Ka Badla

यह कहने के सात बार उसने मेरे पेट और छाती में चाकू के कई वार किए। मेरी मौत हो गई। सुबैया ने मेरी लाश को जैस्मिन मिल्स के गेट नंबर एक के सामने पाइप लाइन मे डाल दिया। मेरी लाश सड़ी-गली हालात में वहां है।

कैसे हुवा Bhut प्रेत Aatma Ka Badla पूरा.

अदालत में न्यायिक मैजिस्ट्रेट के समक्ष जब ब्यौरा प्रस्तुत किया, तो वह भी आश्चर्यचकित राह गए। विवरण के अनुसार चार सिपाइयो के साथ दरोगा अरुण खेत जैस्मिन मिल्स के उक्त स्थान पर गवाओ के साथ पहुचे, तो पाइप लाइन की टंकी में एक कंकाल हकीकत में मौजूद था। कंकाल का दाया पैर पानी के बहाव में आकर बह गया लगता था।

महाराष्ट्र पुलिस की फोरेंसिक report के मुताबिक, कंकाल की खोपड़ी के फोटो को मरने वाले के फोटो के साथ सुपर-पोज़ करके पाया गया कि कंकाल मरने वाला का ही था।

रिपोर्ट में कहा गया था कि मरने वाले कि उम्र 30 से 35 वर्ष के मध्य थी। उसके दाये जबड़े में 2 दाँत काम थे। बाये पैर की हड्डी टूटी थी, जो कुछ समय पहले ही जुड़ी होनी चाहिए।

चंद्रप्पा की विधवा मालती ने बताया कि सचमुच उसके पति के जबड़े मे दो दाँत काम थे। दुर्भाग्यवश एक दुर्घटना मे उनके दो दांत तथा बांए पैर की हड्डी टूट गयी थी।

तहकीकात के दौरान पता चला कि चंद्रप्पा शराबी था। एक बार नशे की हालत मे उसे लेकर शराबखाने का मालिक सुबैया स्वयं धारावी रोड पर उसके भवन “सन्तोषसदन” के फ्लैट न.23 में आया था।

तभी उसने वहा चंद्रप्पा की पत्नी मालती को देखा था। बाद में न जाने कैसे सुबैया और मालती में अवैध संबंध स्थापित हो गए। इस संबंध में अचानक ही एक रात देर से घर लौटने पर चंद्रप्पा को मालूम पड़ा।

दोनो मर्द एक दूसरे से रंजिश रखने लगे। यज्ञपी चंद्रप्पा ने अपनी पत्नी को माफ कर दिया और मालती ने भी आइंदा ऐसा न करने की सौगंध खा ली।

मगर चोरी छिपे यह खेल बराबर चलता रहा। हद तो यह थी कि दोनों एक दूसरे के लिए इतने पागल थे कि उन्होंने एक बार भागकर कही बस जाने का इरादा भी कर लिया था।

मालती अपने शराबी पति से परेशान थी, लेकिन दारू का अड्डा चलाने वाले सुबैया के लिए उसका आरक्षण भरपूर था।

Pret aatma ka badla ! Aahat aatma ka badla.

देर सवेरे ऐसे संबंधों का घड़ा चौराहे पर फूटना था, सो फुट गया। मुहल्ले के लोगो ने चंद्रप्पा को सच्चाई बता दी। वह अपने यार दोस्तो के साथ सुबैया के अड्डे पर गया और उसको बड़ी ही बेरहमी से मारा।

अवैध शराब का कारोबार करने वालो के व्यापक संबंध होते ही है। सुबैया के भी थे। उसने शीघ्र ही चंद्रप्पा को माफी और पछतावे का अभिनय करके झांसा दिया और अपने दारुखाने पर बुलाकर पहले तो खूब शराब पिलाई और बाद में उनकी हत्या कर दी।

लाश को जास्मिन मिल्स की पाइप लाइन की टंकी में डाल दिया, जहा से उसे पुलिस नव बरामद किया।

अंततः पुलिस ने बरामद कंकाल, फोरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट, मृतक की विधवा मालती के बयान और जांच पड़ताल के निष्कर्ष के आधार पर 27 मार्च, सं 1970 ई.को ही सुबैया नायर को हिरासत में ले लिया। थोड़ी मार पिटाई के पश्चात पुलिस सुबैया का मुह खुलवाने में सफल हो गई।

उसने भी लगभग वही सब बताया , जो पुलिस पहलाद से जान चुकी थी। मगर ठोस सबूत न होने के कारण सुबैया को 6 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में नाही लिया जा सका।

अवधी खत्म उसे 29 अप्रैल को आर्थर रोड की जेल में भेजा गया। जहाँ जुलाई 5 को उस पर चंद्रप्पा के bhoot ने हमला बोल दिया। सुबैया जख्मी हालत में अस्पताल लाया गया।

जहाँ उसने डॉक्टरों को भी पूरी घटना थरथर कांपते हुए सुनाई। उसके पूरे शरीर पर विचित्र तरह की खरोंचे थी।

Aatma Ka Badla पूरा हुवा.

चंद्रप्पा के bhut ने 13 जुलाई को फिर से सुबैया पर हमला बोल दिया। उनकी पीठ और सिर पर अज्ञात प्रहारों से ऐसे जख्म बन गए थे, मानो किसी मसुल से मारा गया हो।

23 जुलाई को, यानी पिछली घटना के ठीक दसवे रोज सुबैया को कोठरी में मृत पाया गया। उसके मुंह और नाक से खून रिस रहा था। दिल ने काम करना बंद कर दिया था। इस तरह हताहत का प्रेत भूत प्रेत की चर्चित कहानिया पाई गई है।

अपने आसपास कही एसी Atma kahani जैसी bhutiya kahani घटित होई हो या फिर कोई एसी bhoot story जो आप पूरी Bhoot Wali Kahani यहा लिखा हुवा देखना चाहते है तो हमसे contact करके जरुर बताये ।

इस प्रकार से हताहत प्रेत आत्मा का बदला आखिर तक नहीं तमा जब तक अपने हत्यारे को उसने तडपा-तडपाकर मार नहीं दिया. यहा पर ख़त्म हुए एक Aatma Ka Badla Ghost Stories In Hindi

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