Lobhi Gidhad, Shikari Aur Suvar Ki Hindi Story- Lalach Buri Bala Hai Romanchak Hindi Kahani

प्रिय पाठक, स्वागत है आपका आज की Hindi Story Collection की Lobhi Gidhad, Shikari Aur Suvar Ki Hindi Story- Lalach Buri Bala Hai इस कहानी पर. हिंदी कहानी संग्रह की आज की कथा लोभी गिधड की है जो ज्यादा खाने के लालच मे अपनी मौत को बुला लेता है. यह स्टोरी बेहद रोमांचक है जिसे आप अंत तक अवश्य पढ़े आपको बेहद हसी आएगी पढ़ने के बाद. तो चलिए शुरु करते है हिंदी कहानी को शुरुवात से.Shikari, Suvar Aur Lobhi Gidhad Ki Kahani

एक जंगल था जिसका नाम था नंदन वन, जंगल बेहद घना था. उस जंगल मे हर रोज कोई न कोई शिकारी शिकार के लिए आता ही रहता था. एक बार नंदनवन मे रोज की तरह एक शिकारी शिकार करने के लिए आया. बहुत देर तलाश करने के बाद उसे एक मोटा-ताजा तगड़ा सूअर दिखाई दिया.

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शिकारी को बेहद ख़ुशी हुयी इतने ताजे-तगड़े सूअर को देखकर, उसने सोचा आज का दिन अच्छा ही जो इतना अच्छा शिकार मिल रहा है. उसने बाण को धनुष पर चढ़ाया और अपने कान तक खींचकर तेजी से सूअर की तरफ चला दिया. शिकारी का निशाना बिलकुल सही जगह पर लगा, बाण की चोट खाकर बेचारा सूअर दर्द और क्रोध से तड़प उठा, पर मरते-मरते वह भी तेजी से शिकारी पर झपट पड़ा.

शिकारी और सूअर मे काफी देर तक संग्राम चलता रहा. लेकिन सूअर के आगे शिकारी की एक न चली और वह सूअर से पहले ही अपने प्राणो से हाथ दो बैठा. समय की याचना देखिये कुछ ही देर मे तीक्ष्ण बाण की धार को सूअर भी और अधिक सहन नही कर पाया और शिकारी के पास मे ही वह भी ढेर हो गया.

बेचारे दोनों ही शिकारी और सूअर एक जगह पर अपनी जान खोकर पढ़े थे तभी कुछ देर बाद घूमता-घामता एक गिधड उधर से आ रहा था. जब उसने देखा की एक सूअर और एक आदमी मृत पढ़े है तो उसे बेहद ख़ुशी है. उसकी ख़ुशी का तो कोई ठिकाना ही नहीं रहा और हो भी क्यों ना बिना किसी कार्य के कामचोर गिधड को कई दिन भोजन का जो प्रबंध हो गया था. वह Lobhi Gidhad इतना लोभी था की यह भी नही सोच रहा था की ज्यादा लोभ अच्छा नहीं.

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Lobhi Gidhad ने सोचा मै कई दिन तक इस मांस से अपनी भूख को मिटाऊंगा. अब यह सारा भोजन मेरा है इसे धीरे-धीरे आराम से खाऊंगा, ताकि बहुत दिनों तक मुझे यह खाना मिल सके.

सबसे पहले इस धनुष की डोर का निपटारा कर लू. यही सोचकर गिधड ने डोर मे दात मारने के लिए धनुष के एक कोने को मुह मे लिया और धीरे-धीरे डोर को खाने की कोशिश करने लगा.

तभी अचानक…!

डोर के टूटने से धनुष का जो कोना उसके मुह मे था. वह उसके तालू को चीरकर सीर से बाहर हो गया. अरे-अरे बेचारा गीधड दर्द के मारे जोर से चिल्ला उठा. इधर-उधर जमीन पर बहुत देर तक दर्द के मारे जमीन पर सर पटकने लगा लेकिन उसका दर्द कुछ भी कम होने का नाम नही ले रहा था.

काफी देर तक चिल्लाने-सर पटकने के बाद Lobhi Gidhad ने भी शिकारी और सूअर की तरह बुरी तरह से दम तोड़ दिया. इसीप्रकार से गिधड का लोभ ही उसकी जान का दुश्मन बन गया जिसमे परिणाम स्वरुप वह अपनी जान से हाथ धो बैठा.

सिख – हमेशा ज्यादा लालच Lobhi Gidhad की तरह संकट को आमंत्रण देता है. ज्यादा लालच कभी ना करे अपने हिस्से मे आयी हर वस्तु और ख़ुशी से संतुष्ट रहे इसी मे भलाई होती है.

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इसप्रकार से ऊपर दी गयी Lobhi Gidhad, Shikari Aur Suvar की हिंदी कहानी का अंत होता है. आशा करते है आज की Hindi Katha आपको जरुर पसंद आयी होगी. अगर यह हिंदी की कहानी आपको पसंद आयी हो तो सोशल मिडिया मे अपने दोस्तों के साथ शेयर करके उन्हें भी गुद-गुधाये. Hindi Story Collection की हर नयी हिंदी की कहानिया अपने ईमेल इनबॉक्स पर पाने के लिए ब्लॉग को सब्सक्राइब करना ना भूले.

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