Laalach Buri Bala Hai – Hardatt Ke Murkh Bete Aur Chamatkarik Saamp Ki Avismarniya Hindi Ki Kahani

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Laalach Buri Bala Hai Behatareen Hindi Story

Laalach Buri Bala है यह Hindi Story हरदत्त नाम के एक शांतिप्रिय इंसान, चमत्कारिक सांप, और हरदत्त के मुर्ख बेटे की है जो अति लालच के कारन सीधे मौत को प्राप्त कर लेता है.

किसी गाँव मे हरदत्त नाम का एक ब्राम्हण रहता था. वह स्वभाव से बड़ा दयालु और शांतिप्रिय था. अगर कोई व्यक्ति उसका अहित भी कर देता था तो यह कहकर वह चुप हो जाता था की इसके अन्याय की सजा इसे कोई और देगा.

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गर्मी के दिन थे, हरदत्त अपने खेत मे ही एक पेड़ की छाया मे लेटा हुवा था. एकाएक उसने सांप के फुफकारने की आवाज सुनी तो हडबडाकर उठ बैठा.

हरदत्त ने देखा की पास ही एक काला सांप अपने बिल मे फन फैलाये बैठा है. हरदत्त बहुत दर गया. साहस करके वह वहा से उठा, पर उसने सोचा – ‘यह तो बहुत बड़ा सांप है लेटे हुए देखकर भी इसने मुझ पर हमला नही किया, न ही मुझे काटा. मुझे इसको दूध पिलाना चाहिए.

यही सोचकर वह घर जाकर एक कटोरा दूध भर लाया और सांप के आगे रख दिया. दुसरे दिन हरदत्त जब खेत आया, तो उसने देखा की सांप के बिल के पास खाली कटोरे मे एक मुहर रखी हा. हरदत्त खुश हो गया. वह निर्धन था. एक मोहर के रूप मे उसे अच्छा धन मिल गया.

अब उसका प्रतिदिन का यह नियम बन गया की वह सांप के कटोरे मे दूध डाल जाता और उसे रोज ही एक मोहर मिल जाती थी. धीरे-धीरे हरदत की गरीबी मिटने लगी. उसने खेती के लिए कुछ और भूमि खरीद ली और थोडा व्यापार भी फैला लिया. इस तरह से अब हरदत्त संतुष्ट था. उसने कभी लालच नही दिया उसको पता था Laalach Buri Bala है इससे अपना नुकसान ही होगा.

एक बार किसी काम से हरदत्त को दुसरे गाँव जाना पड़ा. जाते हुए वह अपने बेटे से कह गया- सांप को दूध पिलाना न भूलना. अगले दिन हरदत्त के पुत्र ने सांप के कटोरे में, एक सोने की मुहर पढ़ी है. उसने सोचा, इस सांप का बिल जरुर सोने की मुहरो से भरा पड़ा है. यदि इसे मार डाला जाये, तो यह सारा खजाना अपना हो जायेगा. मुर्ख इंसान के मन मे इतना लालच भर गया था की पल भर भी नही सोचा की Laalach Buri Bala है.

उसने एक डंडा लिया और उस पेड़ के पास पंहुचा. सांप ने डंडे को लिए उसके बेटे को देखा. लड़के ने डंडे से सांप पर वार किया, पर वार खाली चला गया. क्रोध से फुम्प्कारता हुवा सांप आगे बड़ा और उसने अपने विशेले दांतों से हरदत्त के बेटे को काट लिया.

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हरदत्त का लड़का मारे दर्द के तड़पने लगा और देखते ही देखते उसके प्राण-पखेरू उड़ गए. जब हरदत्त लौटा तो उसने सारी बात सुनने के बाद अपना सर पिट लिया. लेकिन अब क्या हो सकता था? बेचारा रो-धोकर चुप हो गया, अगले दिन वह दूध लेकर फिर सांप के बिल पर जा पंहुचा.

सांप ने अन्दर से ही कहा हरदत्त’ हमारी तुम्हारी मित्रता अब टूट चुकी है. तुम्हारे बेटे के लालच से एसा हुवा है. अब प्रयत्न करने पर भी वह जुड़ नहीं सकती. आगे से यहाँ कभी मत आना. न मै तेरे पुत्र की डंडे की चोट को भूल सकता हु न तू अपने पुत्र की मृत्यु की बात भूल सकता है. इसलिए तेरा मेरा मेल आगे नहीं चल सकेगा, अब तुम यहाँ से चले जाओ.

बेचारा हरदत्त बेटे की मूर्खतापूर्ण लालच के कारण अपने पुत्र और एक अच्छे मित्र से वंचित हो गया, और फिर हरदत्त उस बिल की और नहीं गया.

सिख – ‘ज्यादा Laalach Buri Bala है” यह संकट को आमंत्रण देती है. इसप्रकार का मुर्खता भरा लालच करने से पहले एक बार नहीं हजार बार सोचे.

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