ब्रम्हराक्षस कल्माषपाद, ऋषिमुनि वसिष्ट और गौतम रुषी की बेहतरीन हिंदी कथा

प्रिय पाठक, हिंदी कहानी संग्रह की आज की पोस्ट ब्रम्हराक्षस कल्माषपाद, ऋषिमुनि वसिष्ट और गौतम रुषी की बेहतरीन हिंदी कथा पर आपका स्वागत है. आज की कहानी श्री गुरुचरित्र से जुडी है जिसे पढके आपको काफी प्रसन्नता जरुर होगी इसीलिए इस हिंदी कथा को पुरा पढ़े जो बहुतही अच्छी सिख प्रधान करती है.ब्रम्हराक्षस-Ki-Hindi-Kahani..

इक्ष्वाकु नाम का एक जानामाना घराना था. इस घराने में बहुत महान, प्रतापी, राजाओ ने जन्म लिया. यह कथा इसी वंशज के एक राजा की है. उस राजा का नाम इष्ठमित्र था. बहुत ही महान राजा में उसकी ख्याति थी. इष्ठमित्र को शिकार की आदत थी. हमेशा वह शिकार के लिए जंगल में जाता था.

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एसेही एक दिन घने जंगल में वह शिकार के लिए गया. घने जंगल में घूमते-घूमते एक राक्षस ने राजा पर हमला कर दिया. लेकिन राजा डरा नही उसने राक्षस पे अपने कमान से तिरो की झड़ी लगा दी. राक्षस घायल हो गया और आखिर वह मर भी गया.

लेकिन पास में ही उस राक्षस का भाई था. अपने भाई को मरा हुवा देख दूसरा राक्षस बहुत दुखी हुवा. उसने राजा से बदला लेने की मनही मन ठानली.


उस राक्षस के भाई ने बाद में आदमी का रूप धारण किया और उसी राजा के महल में काम करने के लिए लग गया. कुछ ही दिनों में राक्षस का भाई इष्ठमित्र राजा का चहिता भी बन गया. राजा को इसकी भनक भी नहीं लगी की वह राक्षस हो सकता है.

कुछ दिनों बाद राजा राजधानी में वापस लौटा. उस आदमी के रूप को धारण किये राक्षस ने रसोईघर का काम अपने हातो में लिया. एक दिन राजा के पिताजी का श्राद्ध था. उस समय राजा ने महान रुशिमुनी वसिष्ठ तथा कई सारे रुषिमुनियो को श्राद्ध के लिए आमंत्रित किया.

अभी रसोईघर के काम में था यह राक्षस, उसने किसी को खबर हुए बिना मनुष्य के मांस के पकवान बनाये. रुशिमुनी खाना खाने के लिए बैठे, मुनि वसिष्ट भी बैठे. लेकिन खाने में मनुष्य के मांस के टुकड़े देख वसिष्ठ रुषी बहुत क्रोधित हुए. उन्होंने राजा को श्राप दिया राजा तुमने हमें मनुष्य के मांस के टुकड़े परोसके हमारा अपमान किया है.  मै तुम्हे श्राप देता हु की तुम ब्रम्हराक्षस बनोगे.

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राजा इष्ठमित्र को इसके बारे में कोई खबर नहीं थी. बहुत ही गुस्से में राजा ने भी सोचा की मेरी कोई गलती ना होने पर भी मुझे रुशिमुनी वसिष्ठ ने श्राप दिया एसा सोचकर उसने भी गुस्से में हाथ में पानी लेकर वसिष्ठ को श्राप देने की तय्यारी कर ली.

लेकिन राणी दमयंती ने राजा को समजाया तब जाके राजा का गुस्सा शांत हुवा और अपने हाथ में लिया हुवा पानी उसने अपने पैरो पर छोड़ दिया. इसी लिए राजा के पैर काले पढ़ गए. एसा होने पर राजा ब्रम्हराक्षस बन गया जिसे कल्माषपाद भी कहा जाता है. लेकिन राणीने वसिष्ठ रुषी से क्षमा मांगी. लेकिन रुशिमुनी वसिष्ठ ने कहा की राजा बारा सालो बाद फिर से ब्रम्हराक्षस से राजा बन जायेंगे.

कल्माषपाद ब्रम्हराक्षस जंगलो में भटकता रहता था. एक दिन वह ब्रम्हराक्षस जंगल में इसी तरह भटक रहा था तब उसे एक ब्राम्हण जोड़ी दिखाई दी. ब्रम्हराक्षस ने उनमे से आदमी को खाने लगा लेकिन ब्राम्हण की बीबी ने कल्माषपाद से विनती की आप मेरे पति को ना खाए चाहे आप मुझे खा जाइये. लेकिन ब्राम्हण की पत्नी की बात को अनदेखा करके ब्रम्हराक्षस ने ब्राम्हण को ही खा लिया.ब्रम्हराक्षस-Ki-Hindi-Kahani.

यह देखकर ब्राम्हण की पत्नी तिलमिला उठी. उसने उस ब्रम्हराक्षस को श्राप दिया और कहा की जब तुम फिर से ब्रम्हराक्षस से राजा बनोगे तब राणी के साथ खुश रहना चाहोगे तब पहले दिन ही मर जाओगे. इतना कहके ब्राम्हण पत्नी सती चली गयी.


ठीक बारा सालो बाद कल्माषपाद फिर से राजा बने. उसने वह कहानी राणी को सुनायी. हमें संतान सुख का लाभ नहीं मिल सकता यह सोचकर दोनों ही बहुत दुखी हुए. यह ब्रम्हहत्या का पाप मिटाने के लिए राजाने तीर्थयात्रा की, काफी सारे यग्य किये, दानधर्म किया लेकिन ब्रम्हहत्या के पाप ने उसका पीछा छोड़ा नहीं. मरने की सोच हमेशा मन में होने पर राजा को मिथिला नगरी में गौतम रुषी के दर्शन हुए.

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गौतम रुषी ने राजा से कहा की आप गोकर्ण क्षेत्र में भगवान शंकर वास करते है. अगर तुम वहा जाओगे तो जरुर इस ब्रम्हराक्षस द्वारा किये गए पाप से तुम मुक्त हो सकोगे. गौतम ऋषि के कहने पर राजा गोकर्ण क्षेत्र गया और वहा पर खूब मन लगा कर भगवान शंकर की भक्ति की. सच्चे मन से भगवान की भक्ति करने से राजा ब्रम्हराक्षस के द्वारा किये गए ब्रम्हहत्या के पाप से मुक्त हुवा.

सिख- राजा की कोई गलती ना होने पर भी ब्रम्हहत्या के पाप से घिर गए. इसी लिए हमेशा अपने साथ किसी को भी पूरा विश्वास रखने पर उसके बारे में सबकुछ जान ले वरना बहुत पछताना पढ़ सकता है.

आशा करते है की ऊपर दी गयी ब्रम्हराक्षस कल्माषपाद, ऋषिमुनि वसिष्ट और गौतम रुषी की बेहतरीन हिंदी कथा यह पोस्ट आपको पसंद आयी होगी. अगर आप को यह कहानी पसंद आयी हो तो इसे सोशल मीडिया में जरुर शेयर करे. इसी प्रकार की भूतो की कहानी, बेहतरीन कहानी, तथा हिंदी कहानिया से भरी हमारे ब्लॉग की पोस्ट सीधे अपने ईमेल इनबॉक्स में पाने के लिए ब्लॉग को subscribe करना ना भूले.

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